टुकुडांड में आयोजित जिला स्तरीय सुशासन त्यौहार शिविर उस समय विवादों में घिर गया, जब अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पहुंचे जिला पंचायत सदस्य एवं किसान नेता सुरेश आयाम को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रतापपुर विकासखंड के टुकुडांड में जिला प्रशासन द्वारा सुशासन त्यौहार के अंतर्गत जिला स्तरीय शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में आम लोगों की समस्याओं के निराकरण और विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी देने का दावा किया गया था। इसी दौरान जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम अपने समर्थकों और ग्रामीणों के साथ वहां पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पूर्व सुरेश आयाम ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व प्रतापपुर को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की कई समस्याओं के निराकरण की मांग की थी। ज्ञापन में किसानों को खाद उपलब्ध कराने, जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों को पूरा कराने, खराब सड़क व्यवस्था सुधारने, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट दूर करने तथा विभिन्न विभागों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं।
आरोप है कि प्रशासन द्वारा तय समय सीमा के भीतर इन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज होकर सुरेश आयाम ने अपने समर्थकों के साथ शिविर स्थल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रशासन पर आम जनता की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिविर स्थल पर सुरेश आयाम और उनके समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा। प्रदर्शन के दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन मामला बढ़ता चला गया।स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी निर्मित हो गई। बाद में पुलिस ने बलपूर्वक कार्रवाई करते हुए जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम को हिरासत में लेकर थाने पहुंचा दिया। उनके साथ मौजूद कुछ समर्थकों को भी पुलिस ने थाने ले जाकर बैठाया।
घटना के बाद समर्थकों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि जनता की समस्याओं को उठाने वाले जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र के खिलाफ है। वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई को उचित बताते हुए कहा कि सरकारी कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करना सही नहीं था। घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते मांगों पर गंभीरता से विचार करता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिविर में शांति व्यवस्था बनाए रखना जरूरी था। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के कारण कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न हो रहा था, इसलिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रतापपुर क्षेत्र में सुशासन त्यौहार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है। वहीं सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन किसानों और ग्रामीणों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है।

