Rajnath Singh’ नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारत सरकार ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन और संसाधनों की बचत की अपील के अगले ही दिन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सरकार ऊर्जा आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
राजनाथ सिंह की अपील: “घबराएं नहीं, सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की 5वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के बाद उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि घबराने (Panic) की कोई जरूरत नहीं है।
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“मैं लोगों से शांत रहने और किसी भी तरह की अफवाह या घबराहट से बचने की अपील करता हूँ। सरकार ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं (Energy Supply Chains) और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर सतर्कता से नजर रख रही है।” – राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
पीएम मोदी की ‘आर्थिक राष्ट्रवाद’ वाली अपील
यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार को हैदराबाद में दिए गए उस संबोधन के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को ‘राष्ट्रीय चरित्र’ की परीक्षा बताया था। पीएम मोदी ने नागरिकों से 7 प्रमुख आग्रह किए थे:
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ईंधन की बचत: मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कार-पूलिंग का उपयोग करें।
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वर्क फ्रॉम होम (WFH): ऑफिस और बिजनेस फिर से डिजिटल मीटिंग्स और WFH को बढ़ावा दें।
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सोने की खरीद पर रोक: अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचें।
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स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता: ‘मेड इन इंडिया’ सामान ही खरीदें।
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विदेशी यात्राओं से परहेज: विदेशी छुट्टियों और डेस्टिनेशन वेडिंग के बजाय घरेलू पर्यटन चुनें।
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खाद्य तेल का संयम: आयातित खाद्य तेल (Edible Oil) की खपत कम करें।
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प्राकृतिक खेती: किसान रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 50% तक कम करें।
क्यों चिंतित है सरकार?
मिडिल ईस्ट में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों पर तनाव के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल इसी क्षेत्र से आयात करता है। सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को सुरक्षित रखना और देश को किसी भी बड़े आर्थिक झटके से बचाना है।

