धमतरी। जिले के कुरुद ब्लॉक में मनरेगा के तहत विकास कार्यों की रफ्तार तेज होने के बीच अब बुजुर्ग मजदूरों को रोजगार से वंचित किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कई पंचायतों में 60 वर्ष से अधिक आयु के जॉब कार्डधारी ग्रामीणों को केवल इसलिए काम नहीं दिया जा रहा क्योंकि वे सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ ले रहे हैं। जबकि मनरेगा नियमों में ऐसी किसी रोक का प्रावधान नहीं है।
75 पंचायतों में चल रहे 374 विकास कार्य
ब्लॉक की 108 पंचायतों में से 75 पंचायतों में वर्तमान में 374 कार्य संचालित हैं। इनमें तालाब निर्माण, तालाब गहरीकरण, प्रधानमंत्री आवास, नाला ट्रीटमेंट और पौधरोपण जैसे कार्य शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन कार्यों में प्रतिदिन लगभग 5 हजार मजदूर काम कर रहे हैं और रोजाना 10 लाख रुपये से अधिक की मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप: पेंशनधारियों को नहीं मिल रहा काम
ग्राम पंचायत जोरातराई(सी), इर्रा, कोर्रा, नवागांव, राखी, अटग, कुर्रा और तर्रागोंदी समेत कई पंचायतों के बुजुर्गों ने शिकायत की है कि पंचायत प्रतिनिधि और रोजगार सहायक मौखिक रूप से कह रहे हैं कि पेंशनधारियों को मनरेगा में काम नहीं मिलेगा। ग्रामीणों का कहना है कि 500 से 1000 रुपये की पेंशन से आजीविका चलाना मुश्किल है और मनरेगा की मजदूरी ही उनके लिए अतिरिक्त सहारा बनती है।
मनरेगा नियमों में अधितकम उम्र सीमा का प्रावधान नहीं:
मनरेगा अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी ग्रामीण अकुशल श्रम के लिए पात्र है। योजना में अधिकतम आयु सीमा तय नहीं है। वरिष्ठ नागरिकों को उनकी क्षमता के अनुसार हल्के कार्य देने का भी प्रावधान है, जिसमें पानी पिलाने, निगरानी या अन्य सहायक कार्य शामिल हैं।
स्वयं नियम बनाकर रोजगार से वंचित करना गलत:
मामले में एपीओ मनरेगा कुरुद कुंती देवांगन ने स्पष्ट कहा कि मनरेगा में काम करने के लिए कोई अधिकतम उम्र सीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पंचायत स्वयं नियम बनाकर बुजुर्ग पेंशनधारियों को रोजगार से वंचित कर रही है, तो यह नियमों के विरुद्ध है।अकुशल श्रम करने में सक्षम बुजुर्गों को काम दिलाना पंचायतों की जिम्मेदारी है ।
बहरहाल यह स्थिति पंचायत स्तर पर संवाद की कमी और नियमों की गलत व्याख्या को दर्शाती है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन एक ‘कल्याणकारी सहायता’ है, जबकि मनरेगा ‘काम का अधिकार’ (Right to Work) है। दोनों का आपस में कोई टकराव नहीं है।अब देखना यह होगा कि ब्लॉक प्रशासन इन बुजुर्गों को उनका हक दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

