मध्यप्रदेश के कटनी जिले की बहोरीबंद तहसील के ग्राम मोहनिया से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यहां के निवासी जगत यादव बीते लंबे समय से अपनी ही पीड़ा के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है।
एक हादसे ने जगत यादव की जिंदगी बदल दी। उनकी एक आंख पूरी तरह से खराब हो चुकी है, जबकि दूसरी आंख में भी लगातार दर्द और धुंधलापन बना हुआ है। ऐसी गंभीर स्थिति के बावजूद उन्हें मात्र 30 प्रतिशत विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
जगत यादव का कहना है कि उनके पास अपनी स्थिति को साबित करने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। इनमें मेडिकल रिपोर्ट, कलेक्टर को दिए गए आवेदन और 181 सीएम हेल्पलाइन की शिकायत आईडी शामिल हैं।
पीड़ित के मुताबिक, उन्होंने अब तक 5 बार कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया, 5 बार 181 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और 15 से 20 बार जिला अस्पताल और सिविल सर्जन कार्यालय के चक्कर लगाए। लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया।
– 5 बार कलेक्टर को आवेदन
– 5 बार 181 हेल्पलाइन शिकायत
– 20 बार अस्पताल के चक्कर लगा चुके है
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लगातार अनदेखी और सुनवाई न होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
“मेरी एक आंख पूरी तरह से चली गई है, दूसरी से भी साफ नहीं दिखता, फिर भी मुझे सिर्फ 30% विकलांग बताया गया है। मैं कई बार अधिकारियों के पास गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
अब जगत यादव ने मांग की है कि उनकी स्थिति को देखते हुए उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराई जाए, ताकि उनकी वास्तविक विकलांगता का सही आकलन हो सके और उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके।
अब सवाल ये है कि आखिर कब तक एक पीड़ित व्यक्ति यूं ही दफ्तरों के चक्कर लगाता रहेगा? और कब प्रशासन उसकी पीड़ा को समझते हुए उसे न्याय दिलाएगा?
फिलहाल, सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

