कटनी से एक बेहद संवेदनशील और चर्चा में बना मामला सामने आया है, जहां सैकड़ों बच्चों को मानव तस्करी के शक में ट्रेन से उतारकर कार्रवाई की गई। हालांकि अब इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसे कथित तौर पर झूठी या जल्दबाजी में की गई कार्रवाई बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, 11 अप्रैल 2026 को कटनी रेलवे स्टेशन पर पटना-पुणे एक्सप्रेस ट्रेन से करीब 167 बच्चों को पुलिस द्वारा उतार लिया गया। इन बच्चों की उम्र 6 से 15 साल के बीच बताई जा रही है। पुलिस ने यह कार्रवाई मानव तस्करी के संदेह के आधार पर की थी।
लेकिन अब सामने आ रहे तथ्यों में दावा किया जा रहा है कि ये सभी बच्चे अपने परिजनों की सहमति से महाराष्ट्र के लातूर में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जा रहे थे। इस संबंध में दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बिना पर्याप्त जांच और ठोस सबूत के बच्चों और उनके साथ आए शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई।
कार्रवाई पर उठे अहम सवाल
ज्ञापन में कहा गया है कि—
– किसी भी बच्चे के पास टिकट की कमी नहीं थी
– सभी बच्चे आरक्षित कोच में यात्रा कर रहे थे
– यात्रा पूरी तरह से परिजनों की सहमति से हो रही थी
इसके बावजूद पुलिस द्वारा कार्रवाई कर बच्चों को ट्रेन से उतार लिया गया और अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया गया।
10 दिनों तक रोके जाने का आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि बच्चों को 10 दिनों से अधिक समय तक चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) में रखा गया, जबकि परिजनों द्वारा पहले ही शपथ पत्र और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए गए थे, जिनमें स्पष्ट किया गया था कि बच्चे शिक्षा के उद्देश्य से यात्रा कर रहे हैं।
परिजनों की मांग और प्रशासन पर दबाव
परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया जाए और इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है—
क्या यह वास्तव में मानव तस्करी का मामला था, या फिर प्रशासन की एक बड़ी चूक?
इसका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

