“यह लोकतंत्र पर हमला है”: विपक्ष का कड़ा रुख
विपक्ष का मुख्य विरोध इस बात पर है कि परिसीमन के जरिए दक्षिण भारत और छोटे राज्यों के राजनैतिक प्रतिनिधित्व को कम करने की कोशिश की जा रही है।
“यह बिल संघीय ढांचे को तोड़ने वाला और अलोकतांत्रिक है। हम महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन परिसीमन की आड़ में राज्यों के अधिकारों की ‘हिस्सा चोरी’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को सजा देना चाहती है।”
— केसी वेणुगोपाल, महासचिव (संगठन), कांग्रेस
सदन के भीतर माहौल इतना तनावपूर्ण था कि विपक्षी सांसद वेल तक पहुँच गए। शोर-शराबे के बीच मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम 2029 में महिला आरक्षण को हकीकत बनाने के लिए अनिवार्य है।
विवाद की असली वजह
सरकार द्वारा पेश किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। उत्तर भारत के राज्यों, जहाँ जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, वहां सीटों की संख्या में भारी इजाफा होगा। इसके विपरीत, दक्षिण भारतीय राज्यों को डर है कि उनकी राजनैतिक ताकत कम हो जाएगी। विपक्षी दल मांग कर रहे हैं कि परिसीमन के लिए केवल 2026 की जनगणना और जाति जनगणना के आंकड़ों को ही आधार बनाया जाए।
क्या है सरकार का पक्ष
सरकार का तर्क है कि 1971 के बाद से सीटों की संख्या फ्रीज है, जबकि देश की आबादी दोगुने से ज्यादा हो चुकी है। बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए सीटों का बढ़ना जरूरी है।
- 815 सीटें: राज्यों के लिए प्रस्तावित आवंटन।
- 35 सीटें: केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सुरक्षित।
- 33% कोटा: महिला आरक्षण को लागू करने का संवैधानिक रास्ता।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। सुरक्षा घेरे और नारेबाजी के बीच मार्शल को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। अब सबकी नजरें कल होने वाली चर्चा पर हैं, जहाँ सरकार इस बिल को पारित कराने की पूरी कोशिश करेगी।

