धमतरी । प्रदेश के कुछ हिस्सों में अवैध अफीम खेती के मामले सामने आने के बाद जहां राज्य स्तर पर सतर्कता बढ़ी है, वहीं धमतरी जिले में प्रशासन ने समय रहते सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक जांच अभियान चलाया। इस अभियान की पड़ताल में एक राहत भरी तस्वीर सामने आई—जिले में कहीं भी अवैध अफीम की खेती के प्रमाण नहीं मिले हैं।
आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ के निर्देश पर जिले में संभावित क्षेत्रों की पहचान कर गहन सर्वे कराया गया। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के नेतृत्व में राजस्व और कृषि अमले को सक्रिय करते हुए जमीनी स्तर तक पड़ताल की गई। सूत्रों के अनुसार, सर्वे को महज औपचारिकता न मानते हुए संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया, जहां पूर्व में संदिग्ध गतिविधियों की आशंका जताई जाती रही है।
अपर कलेक्टर (भू-अभिलेख) इंदिरा देवहारी और प्रभारी अधिकारी मनोज मरकाम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, एसडीएम सहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सर्वे में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। इसके बाद अमले ने गांव-गांव जाकर खेतों का भौतिक सत्यापन किया।
जांच में सामने आया कि जिले के किसान पारंपरिक एवं वैध फसलों की ओर ही रुझान बनाए हुए हैं। हालांकि प्रशासन ने इसे पूरी तरह संतोषजनक स्थिति मानने के बजाय “सतत निगरानी” की जरूरत पर जोर दिया है।
कलेक्टर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अवैध गतिविधियों पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में आकस्मिक निरीक्षण, ड्रोन सर्वे और जनजागरूकता अभियान के जरिए निगरानी और सख्त की जाएगी।
प्रशासन की इस सक्रियता से जहां संभावित अवैध गतिविधियों पर अंकुश की उम्मीद बढ़ी है, वहीं यह भी साफ हो गया है कि धमतरी फिलहाल इस काले कारोबार से अछूता है—लेकिन निगाहें अब भी खेत-खलिहानों पर टिकी हुई हैं।
