By- Dewesh Dubey
*वाड्रफनगर – से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ फर्जी पट्टा निरस्त करने की मांग को लेकर एक ग्रामीण ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभी वैध दस्तावेजों की जांच पूरी हो जाने के बावजूद पट्टा निरस्त न किए जाने से आक्रोशित ग्रामीण ने एसडीएम कार्यालय परिसर में ही अनशन शुरू कर दिया है। इस घटनाक्रम से क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, वाड्रफनगर निवासी रामहरि गुप्ता लंबे समय से एक कथित फर्जी पट्टे को निरस्त कराने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। ग्रामीण का आरोप है कि जिस भूमि का पट्टा जारी किया गया है, वह नियमों के विरुद्ध और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाया गया है। इस संबंध में उन्होंने तहसील और एसडीएम कार्यालय में कई बार लिखित शिकायतें कीं और अपने पक्ष में सभी वैध दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।

ग्रामीण रामहरि गुप्ता का कहना है कि प्रशासन द्वारा दस्तावेजों की जांच भी कर ली गई है और जांच में फर्जीवाड़े के तथ्य सामने आए हैं। इसके बावजूद अब तक संबंधित पट्टा निरस्त नहीं किया गया, जिससे उन्हें भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि तीन दिन पूर्व वे स्वयं एसडीएम से मिले थे और स्पष्ट रूप से अल्टीमेटम दिया था कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे अनशन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीण का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने और प्रमाण सौंपने के बावजूद प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही दिए जा रहे हैं, जबकि जमीन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता को उजागर करता है।

न्याय न मिलने से हताश होकर रामहरि गुप्ता ने मंगलवार को एसडीएम कार्यालय परिसर में अनशन शुरू कर दिया। अनशन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया और कई स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीण के समर्थन में खड़े नजर आए। लोगों का कहना है कि यदि सभी दस्तावेज सही हैं और जांच पूरी हो चुकी है, तो प्रशासन को तुरंत फर्जी पट्टा निरस्त कर न्याय करना चाहिए।
अनशन पर बैठे रामहरि गुप्ता ने कहा,

“मैंने सभी दस्तावेज दे दिए हैं, जांच भी हो चुकी है। फिर भी फर्जी पट्टा निरस्त नहीं किया जा रहा। मजबूरी में मुझे अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो मैं अनशन जारी रखूंगा।”
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस मामले में निर्णय नहीं लिया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल, प्रशासनिक आश्वासन के बाद ग्रामीण ने अनशन समाप्त किया है और सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले में ठोस कार्रवाई कर ग्रामीण को न्याय दिलाता है।

