Varuthini Ekadashi 2026 : नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026। सनातन धर्म में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी ‘वरूथिनी एकादशी’ का विशेष महत्व है। यह एकादशी न केवल भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने का दिन है, बल्कि शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शिव की विशेष आराधना करने से कुंडली के अशुभ ग्रहों के प्रभाव को भी कम किया जा सकता है। इस वर्ष यह पावन व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा।
मान्यता है कि जो फल कन्यादान और वर्षों की तपस्या से मिलता है, वह फल मात्र वरूथिनी एकादशी का व्रत रखने से प्राप्त हो जाता है।
एकादशी पर क्यों करें शिव जी का अभिषेक?
यूं तो एकादशी भगवान विष्णु का दिन है, लेकिन शास्त्रों में ‘शिव-विष्णु’ को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। वरूथिनी एकादशी पर शिवलिंग का विशेष अभिषेक करने से राहु-केतु और शनि जैसे भारी ग्रहों के दुष्प्रभाव शांत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
अभिषेक के लिए खास सामग्रियां और उनके लाभ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन अपनी समस्याओं के निवारण हेतु शिवलिंग पर निम्नलिखित चीजें अर्पित करनी चाहिए:
| सामग्री | धार्मिक लाभ (फल) |
| गन्ने का रस | आर्थिक तंगी दूर होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। |
| दूध और काले तिल | शनि दोष और पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं। |
| केसर युक्त दूध | वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और सुख-सौभाग्य बढ़ता है। |
| पंचामृत | असाध्य रोगों से मुक्ति और आरोग्य की प्राप्ति होती है। |
| शुद्ध शहद | आत्मविश्वास में वृद्धि और वाणी में ओज आता है। |
शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण एकादशी तिथि का विवरण इस प्रकार है:
-
एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 अप्रैल 2026, शाम 07:15 बजे से
-
एकादशी तिथि समाप्त: 13 अप्रैल 2026, रात 08:40 बजे तक
-
पारण का समय: 14 अप्रैल को सूर्योदय के पश्चात।
वरूथिनी एकादशी की पूजा विधि
-
संकल्प: सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और महादेव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
-
विष्णु पूजा: भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल और खरबूजे का भोग लगाएं।
-
शिव अभिषेक: पास के मंदिर जाकर शिवलिंग पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करें।
-
दान का महत्व: इस दिन अन्न दान और जल दान (घड़ा दान) करना सर्वोत्तम माना गया है।
