चंदौली जनपद के मुगलसराय स्थित महिला चिकित्सालय में पिछले करीब 6 माह से रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासाउंड सेवा पूरी तरह बाधित है। इसका सीधा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है, जिन्हें आवश्यक जांच के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा मुफ्त या कम लागत पर उपलब्ध होनी चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं के भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (IPHS) के अनुसार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जांच सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराना अनिवार्य है। गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर अल्ट्रासाउंड जांच को सुरक्षित प्रसव और जटिलताओं की पहचान के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
वहीं, पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत अल्ट्रासाउंड जांच केवल योग्य रेडियोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित विशेषज्ञ द्वारा ही की जा सकती है। ऐसे में 6 माह तक विशेषज्ञ की तैनाती न होना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
अब सवाल उठता है कि 6 माह से रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति क्यों नहीं हुई? क्या मातृ स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में नहीं है? गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
स्थानीय लोगों ने तत्काल रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती कर अल्ट्रासाउंड सेवा बहाल करने की मांग की है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।

