कुरूद। शिक्षा के मंदिर में जहां भविष्य गढ़ा जाना चाहिए, वहीं आज ‘विकास’ की काली परछाईं मासूम सांसों को निगलती नजर आ रही है। कुरूद ब्लॉक के ग्राम बंजारीभाठा स्थित सेंट मेरी इंग्लिश मीडियम स्कूल के समीप संचालित डामर (अस्फाल्ट) प्लांट बच्चों के लिए ‘जहरीला जाल’ बन चुका है। प्लांट से उठता सघन काला धुआं न केवल वातावरण को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि सैकड़ों बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार कर रहा है।
प्रार्थना के बीच घुटती सांसें:
सुबह की प्रार्थना, जो अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है, अब भय और असहजता में बदल गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवा का रुख बदलते ही प्लांट का धुआं स्कूल परिसर को अपनी चपेट में ले लेता है। बच्चे नाक-मुंह ढंककर खड़े रहने को मजबूर हैं। उनकी मुस्कान अब आंखों की जलन, खांसी और सिरदर्द में सिमटती जा रही है।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा:
लंबे समय से प्रशासनिक उदासीनता ने अब अभिभावकों के धैर्य को तोड़ दिया है। पालकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के लिए भेजते हैं, न कि जहरीले माहौल में बीमार होने के लिए। एक अभिभावक ने सवाल उठाया, “क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है? हमारे बच्चों का बचपन बीमारी की भेंट चढ़ रहा है।”
कलेक्टर से शिकायत की तैयारी:
स्थिति से क्षुब्ध अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने अब जिला मुख्यालय धमतरी कूच करने की तैयारी कर ली है। सोमवार को कलेक्टर अविनाश मिश्रा से मिलकर प्लांट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। पालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी:
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डामर प्लांट से निकलने वाले सूक्ष्म कण (PM 2.5) और हानिकारक गैसें बच्चों के फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और दीर्घकालिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, खासकर उन बच्चों में जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
एसडीएम का आश्वासन
> “शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
— नभसिंह कोशले, एसडीएम, कुरूद

