कुरुद। नेशनल हाईवे के अंतर्गत कुरुद से कन्हारपुरी-बगदेही-कोसमर्रा मोड़ तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण कार्य के दौरान पेड़ों की अवैध कटाई का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर लापरवाही की गूंज राजधानी तक पहुंचने के बाद प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। कलेक्टर और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और कटे हुए लकड़ियों की जब्ती बनाकर प्रतिवेदन एसडीएम को सौंप दिया है।
जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य के दौरान बगदेही-भुसरेंगा मार्ग के बीच दोनों ओर स्थित कौहा, सिरसा, बबूल और नीम जैसे सैकड़ों पुराने और छायादार पेड़ों को बिना वैधानिक अनुमति के काट दिया गया। आरोप है कि लकड़ी माफियाओं ने इन पेड़ों को काटकर सीधे आरा मिलों में खपाया, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
हैरानी की बात यह है कि निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे लोक निर्माण विभाग को इस अवैध कटाई की भनक तक नहीं लगी, या फिर मामले में लापरवाही बरती गई। उच्च स्तर से निर्देश मिलने के बाद कलेक्टर अविनाश मिश्रा और वनमंडलाधिकारी कृष्ण जाधव ने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।

बुधवार को पीडब्ल्यूडी इंजीनियर विनायक, वन विभाग के रेंजर डिगेंद्र नेताम, डिप्टी रेंजर एरावत सिंह मधुकर, बीट गार्ड भगतराम चेलक तथा राजस्व विभाग के पटवारी वीरेन्द्र बैस सहित टीम ने कन्हारपुरी-बगदेही मार्ग का निरीक्षण किया। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से जानकारी लेकर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया गया।
राखी नाला के पास डंप की गई लकड़ियों को जब्त कर कोटवार को सुपुर्द किया गया, जिन्हें बाद में वन विभाग द्वारा डिपो तक पहुंचाया गया। तहसीलदार सूरज सिंह बंछोर ने यह प्रतिवेदन एसडीएम नभसिंह कोसले को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है।

हालांकि, अब तक जांच टीम पेड़ों की अवैध कटाई में शामिल जिम्मेदार व्यक्तियों तक नहीं पहुंच पाई है, जिससे कार्रवाई अधूरी बनी हुई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
“मामले की संयुक्त जांच कराई गई है। कटे हुए लकड़ियों को जब्त कर डिपो भेजा जा रहा है। पीडब्ल्यूडी से भी जानकारी मांगी गई है। सभी विभागों से प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

