धमतरी | भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला सड़क पर शनिवार देर रात हुआ एक भीषण हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला बन गया है। चिंवरी-सांकरा के पास तेज रफ्तार इको कार सड़क किनारे खड़ी मेटाडोर से जा टकराई। टक्कर इतनी भयावह थी कि पालगांव निवासी फ़लेंद्र मण्डावी (25 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
अंधेरा, खड़ा वाहन और तेज रफ्तार… हादसे की पूरी कहानी:
सूत्रों के मुताबिक ग्राम पालगांव (थाना दुगली) के ग्रामीण इको कार (CG04 QC 1236) से सेमलगांव से लौट रहे थे। रात करीब 1 बजे चिंवरी-सांकरा के पास सड़क किनारे बिना किसी पर्याप्त संकेत या सुरक्षा के खड़ी मेटाडोर अचानक सामने आ गई। तेज रफ्तार कार सीधे उसमें जा घुसी। सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी व्यस्त सड़क पर रात के समय भारी वाहन यूं ही क्यों खड़े रहते हैं? क्या जिम्मेदार विभाग की निगरानी नहीं थी?
घंटों तड़पते रहे घायल, 108 सेवा नदारद:
हादसे के बाद सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई—‘गोल्डन ऑवर’ में जीवन बचाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह नाकाम नजर आई। पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी के मुताबिक हादसे के तुरंत बाद सूचना दी गई, लेकिन रात 2 बजे तक भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। घायल सड़क पर तड़पते रहे और मदद के लिए इंतजार करते रहे। सवाल यह है कि आखिर आपातकालीन सेवा किसके लिए है?
समाजसेवियों ने निभाई जिम्मेदारी, सिस्टम रहा नदारद:
जब सरकारी तंत्र विफल रहा, तब समाजसेवी सन्नी छाजेड़ और ओमी जैन आगे आए। उन्होंने निजी वाहनों से घटनास्थल पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया और मृतक को पोस्टमार्टम के लिए नगरी भिजवाया। यह पहल सराहनीय जरूर है, लेकिन यह भी दिखाता है कि संकट की घड़ी में आम नागरिकों को ही जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।
जिम्मेदारी तय कौन करेगा?
यह हादसा कई सवाल खड़े करता है:
क्या सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर कोई नियंत्रण है?
क्या भारतमाला जैसे हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या 108 एंबुलेंस सेवा सिर्फ कागजों में ही सक्रिय है?
आक्रोश और मांगें तेज:
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि:
108 एंबुलेंस सेवा की जवाबदेही तय की जाए
सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों पर कड़ी कार्रवाई हो
भारतमाला मार्ग पर रात्रि गश्त और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाए
एक युवक की मौत और छह जिंदगियां खतरे में…
यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम को आईना दिखाने वाला कड़वा सच है। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


