मध्य प्रदेश की सियासत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सत्ता, पैसा और राजनीतिक पकड़—सब कुछ अदालत के सामने फीका पड़ता नजर आया।
कटनी से बीजेपी विधायक संजय पाठक को आज हाईकोर्ट में पेश होना पड़ा, वो भी एक आम आरोपी की तरह सिर झुकाकर।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला आपराधिक अवमानना से जुड़ा है।
कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि विधायक से जुड़ी कंपनियों द्वारा अवैध उत्खनन किया गया।
इससे पहले 1 सितंबर 2025 को जस्टिस विशाल मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
कोर्ट में क्या हुआ?
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच—
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ के सामने सुनवाई हुई।
विधायक संजय पाठक खुद कोर्ट में पेश हुए
उनके वकील ने माफीनामा पेश कर राहत की मांग की
लेकिन कोर्ट ने कोई राहत देने से साफ इनकार कर दिया
अब आगे क्या?
कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि:
अगली सुनवाई 14 मई को होगी
विधायक को फिर से व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा
साथ ही, याचिकाकर्ता को इस आपराधिक अवमानना मामले में सक्रिय सहयोग की अनुमति भी दे दी गई है।
राजनीतिक हलचल क्यों तेज?
यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि:
संजय पाठक को प्रदेश के सबसे प्रभावशाली और धनी विधायकों में गिना जाता है
कोर्ट का सख्त रुख राजनीतिक गलियारों में बड़ा संदेश माना जा रहा है
विपक्ष को भी सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है
“कानून की चौखट पर ना रसूख चलता है, ना रुतबा—
आज कटनी से उठी ये तस्वीर, पूरे प्रदेश की सियासत को आईना दिखा रही है।”

