Shani Mahadasha : शनि की महादशा या साढ़ेसाती में नीलम पहनना सही या गलत? एक चूक बढ़ा सकती है परेशानी

Versha Chouhan
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असल मुद्दा: नीलम किसके लिए शुभ

नीलम शनि का रत्न है। शनि अगर कुंडली में शुभ और मजबूत हो, तब नीलम लाभ देता है। स्थानीय ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, मकर और कुंभ लग्न वालों को नीलम अक्सर अनुकूल रहता है। तुला लग्न में भी कुछ स्थितियों में लाभ दिखता है। लेकिन मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक लग्न में शनि कई बार मारक या बाधक बनता है। इन राशियों में बिना जांच नीलम पहनना जोखिम भरा माना जाता है।

महादशा, अंतरदशा या साढ़ेसाती—फर्क समझिए

ज्योतिष में तीन स्थितियां चर्चा में रहती हैं।

  • शनि महादशा: पूरी कुंडली का गहन विश्लेषण जरूरी। सिर्फ दशा देखकर नीलम नहीं पहनना चाहिए।
  • शनि अंतरदशा: अगर शनि शुभ भाव में हो तभी सीमित समय के लिए प्रयोग की सलाह दी जाती है।
  • साढ़ेसाती: हर साढ़ेसाती खराब नहीं होती। कई मामलों में बिना नीलम भी राहत मिलती है।

ग्राउंड से आवाज: स्थानीय ज्योतिष की चेतावनी

“नीलम तेज रत्न है। गलत कुंडली में यह लाभ नहीं, सीधा नुकसान देता है। पहले कुंडली, गोचर और दशा देखना जरूरी है।”
— पं. रमेश तिवारी, ज्योतिषाचार्य, सिविल लाइंस रायपुर

पहनने से पहले ये टेस्ट जरूरी

रायपुर और दुर्ग संभाग में ज्योतिष सलाह यही है कि नीलम को सीधे अंगुली में न पहनें। पहले 3 से 7 दिन ट्रायल जरूरी माना जाता है।

  • नीलम को चांदी की अंगूठी में बनवाएं
  • शनिवार को मध्यमा उंगली में धारण करें
  • ट्रायल के दौरान अगर डर, नुकसान या बीमारी बढ़े, तुरंत हटा दें

आम लोगों पर असर और आगे क्या करें

शहर में कई लोग साढ़ेसाती के डर से सीधे नीलम खरीद लेते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि दान, सेवा और अनुशासन शनि के सबसे सुरक्षित उपाय हैं। नीलम आखिरी विकल्प होना चाहिए।

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