SC का हिमंत बिस्वा सरमा के ‘शूटिंग वीडियो’ विवाद पर सुनवाई से इनकार, कहा- ‘चुनाव लड़ना अब सुप्रीम कोर्ट में ट्रेंड बन गया है’

Versha Chouhan
3 Min Read

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी 2026) को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह मामला असम भाजपा द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक विवादास्पद ‘टारगेट-शूटिंग’ वीडियो से संबंधित था। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि वे इस मामले को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय संबंधित हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।

“हाई कोर्ट को राजनीतिक अखाड़ा न बनाएं”

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की।

CG NEWS : छत्तीसगढ़ 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा के नियम स्पष्ट, फेल होने पर भी मिलेगा अगली कक्षा में प्रवेश, निजी स्कूल भी होंगे शामिल

  • सीधे SC आने पर आपत्ति: अदालत ने पूछा कि याचिकाकर्ता पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? पीठ ने कहा, “आप सीधे यहाँ आकर हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को कम न करें। क्या हाई कोर्ट भी राजनीतिक लड़ाई का मैदान बन गया है?”

  • चुनावी ट्रेंड: सीजेआई ने टिप्पणी की कि अब यह एक ‘परेशान करने वाला ट्रेंड’ बन गया है कि चुनाव से ठीक पहले हर राजनीतिक मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँच जाता है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि चुनावों का एक हिस्सा अब सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाता है।”

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद 7 फरवरी 2026 को असम भाजपा के आधिकारिक हैंडल से साझा किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ था।

  • वीडियो की सामग्री: वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक राइफल से निशाना लगाते हुए दिखाया गया था। कथित तौर पर एनिमेटेड ग्राफिक्स में वह एक विशेष समुदाय के लोगों की तस्वीरों पर ‘शूट’ करते दिख रहे थे।

  • विवादित कैप्शन: वीडियो के साथ “Point Blank Shot” और “No Mercy” जैसे शब्द लिखे हुए थे।

  • विपक्ष का आरोप: कांग्रेस और वामपंथी दलों (CPI, CPM) ने इसे ‘हेट स्पीच’ और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश बताते हुए एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी जांच की मांग की थी। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने इस वीडियो को डिलीट कर दिया था।

हाई कोर्ट को ‘प्राथमिकता’ देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज तो नहीं किया, लेकिन उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।

  • त्वरित सुनवाई: शीर्ष अदालत ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि यदि याचिकाकर्ता वहां अपील करते हैं, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए।

  • संवैधानिक मर्यादा: कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को संयम बरतने और संवैधानिक नैतिकता की सीमाओं के भीतर रहने की सलाह भी दी।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page