By Kuleshwar Kuswaha
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वाड्रफनगर विकासखंड के मुरका गांव में बनी सड़क महज दो साल के भीतर ही उखड़ने लगी है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। यह सड़क, जो ग्रामीणों के लिए सुविधा और विकास की उम्मीद लेकर आई थी, अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी बनती नजर आ रही है।BALRAMPUR NEWS

2 साल में सड़क की हालत बदतर

2 साल में सड़क की हालत बदतर
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क बनने के कुछ ही समय बाद इसमें दरारें आनी शुरू हो गई थीं। धीरे-धीरे सड़क की ऊपरी परत उखड़ने लगी और अब कई जगहों पर गड्ढे बन चुके हैं। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि वाहन चलाना मुश्किल हो गया है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क शुरुआत से ही कमजोर बनी थी, लेकिन अब इसकी वास्तविकता पूरी तरह सामने आ गई है।

ठेकेदार की 5 साल की गारंटी फेल
PMGSY के नियमों के अनुसार, सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार को कम से कम 5 साल तक सड़क की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी लेनी होती है। लेकिन मुरका गांव के मामले में यह गारंटी पूरी तरह फेल होती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क खराब होने के बावजूद ठेकेदार द्वारा कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है।
लोगों का कहना है कि जब भी शिकायत की जाती है, तो आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है। इससे साफ है कि नियम केवल कागजों में ही लागू हैं, जमीन पर उनका पालन नहीं हो रहा।

ग्रामीणों का आरोप – भ्रष्टाचार का खेल
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे सड़क ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई।
एक ग्रामीण ने बताया, “अगर सही तरीके से काम हुआ होता तो सड़क इतनी जल्दी खराब नहीं होती। यह साफ तौर पर पैसे की बंदरबांट का मामला है।”BALRAMPUR NEWS
लोगों का यह भी कहना है कि निर्माण के समय न तो गुणवत्ता की जांच हुई और न ही किसी अधिकारी ने सही तरीके से निगरानी की।
विभाग पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि संबंधित विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ठेकेदारों को संरक्षण दे रहा है, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो रही।
कई बार शिकायत करने के बावजूद जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो लोगों का भरोसा प्रशासन से उठने लगा है। उनका कहना है कि अगर अधिकारी समय रहते कार्रवाई करते, तो सड़क की यह हालत नहीं होती।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह कोई पहला मामला नहीं है जब PMGSY के तहत बनी सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जहां सड़कें तय समय से पहले ही खराब हो गईं।
इसके बावजूद न तो सख्त कार्रवाई होती है और न ही दोषियों के खिलाफ कोई उदाहरण पेश किया जाता है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और योजनाओं की साख पर असर पड़ता है।
ग्रामीणों की बढ़ती परेशानी
सड़क खराब होने से ग्रामीणों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और किसानों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब सड़क पर पानी भर जाता है और गड्ढे नजर नहीं आते। इससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ग्रामीणों की मांग – हो निष्पक्ष जांच
ग्रामीणों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषी ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
साथ ही, सड़क का पुनर्निर्माण उच्च गुणवत्ता के साथ किया जाए और भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
मुरका गांव की यह सड़क सिर्फ एक निर्माण कार्य की विफलता नहीं है, बल्कि सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। जब योजनाएं कागजों में सफल दिखती हैं, लेकिन जमीन पर असफल हो जाती हैं, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को होता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
ग्रामीणों की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा एक अहम मुद्दा है।

