धमतरी। खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही जिले में खाद वितरण व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। गोदामों में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। वजह है—नए एग्रीस्टेक पंजीयन (AgriStack Registration) और ई-उर्वरक सॉफ्टवेयर का अधूरा ‘ट्रायल रन’, जिसने वितरण प्रक्रिया को लगभग ठप कर दिया है।
भंडारण पूरा, लेकिन वितरण ठप
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले की कुल भंडारण क्षमता 22,100 टन है, जिसके मुकाबले वर्तमान में 15,935 टन (करीब 72%) खाद उपलब्ध है। इसके बावजूद अप्रैल से अब तक केवल 205 किसानों को 136 टन खाद ही वितरित हो सकी है। हालात यह हैं कि किसान सोसायटियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
नई व्यवस्था बनी परेशानी की वजह
इस वर्ष सरकार ने खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ई-उर्वरक सॉफ्टवेयर लागू किया है, जिसे एग्रीस्टेक डेटाबेस से जोड़ा गया है। इसके तहत:
बिना पंजीयन किसानों को खाद नहीं मिलेगी
जमीन के रकबे के अनुसार ही खाद की मात्रा तय होगी
भविष्य में धान खरीदी और सरकारी योजनाओं का लाभ भी इसी डेटाबेस से जुड़ा होगा
जिले में करीब 1.30 लाख किसानों में से 1.20 लाख का पंजीयन हो चुका है, लेकिन सिस्टम पूरी तरह चालू नहीं होने से इसका लाभ जमीन पर नहीं दिख रहा।
‘ट्रायल रन’ बना बाधा
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस सॉफ्टवेयर के जरिए खाद वितरण होना है, वह अभी भी ट्रायल मोड में है। तकनीकी खामियों के कारण सोसायटियों में वितरण शुरू नहीं हो पा रहा है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है, वहीं कुछ जगहों पर कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है।
अधिकारियों का दावा—जल्द सुधरेंगे हालात
> “एग्रीस्टेक पोर्टल किसानों का डिजिटल डेटाबेस है, जिसमें जमीन, फसल, ऋण और बीमा की जानकारी रहती है। इसे भविष्य की सभी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। सॉफ्टवेयर को जल्द स्थिर कर खाद वितरण सामान्य किया जाएगा।”
— मोनेश साहू, उपसंचालक, कृषि विभाग

