अंबिकापुर | 28 अप्रैल 2026
कहावत है—“चिराग तले अंधेरा”, लेकिन अंबिकापुर में तो हाल कुछ ऐसा रहा कि “वर्दी के साए में ही वारदात” हो गई। गांजा तस्करों पर शिकंजा कसने निकली पुलिस टीम खुद ऐसी घटना का शिकार हो गई, जिसने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी। पुलिस अंदर रेड में व्यस्त थी और बाहर से उनकी सरकारी बोलेरो गायब!
जब ‘शिकारी’ ही बन गया शिकार
कोतवाली थाना क्षेत्र के सत्तीपारा इलाके में प्रशिक्षु डीएसपी निशांत कुर्रे के नेतृत्व में टीम दबिश देने पहुंची थी। पुलिस ने गाड़ी सड़क किनारे खड़ी की और तस्करों की तलाश में गलियों में घुस गई। इसी दौरान मौके की ताक में बैठे मुकेश नामदेव ने ऐसा दांव खेला कि खाकी भी चौंक गई—सीधे पुलिस की बोलेरो लेकर चंपत!
मोबाइल बना गेमचेंजर, चोर की निकली ‘लोकेशन’
जब टीम वापस लौटी, तो न तस्कर मिले न गाड़ी। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पता चला कि गाड़ी में एक अधिकारी का मोबाइल फोन छूट गया है। साइबर सेल ने तुरंत लोकेशन ट्रैक की और सिग्नल सीधे राम मंदिर क्षेत्र की ओर इशारा करने लगा।
इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर मुकेश नामदेव को बोलेरो समेत धर दबोचा।
चाय ठेलों पर चर्चा, ‘लापरवाही’ पर सवाल
गाड़ी तो बरामद हो गई और आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गया, लेकिन इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। शहर में लोग चुटकी लेते नजर आ रहे हैं—
“जब पुलिस अपनी गाड़ी नहीं बचा पाई, तो आम आदमी क्या उम्मीद करे?”

