कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय को ही कुर्क करने के लिए न्यायालय के कर्मचारी पहुंच गए। यह पूरी कार्रवाई करोड़ों के सरकारी तामझाम के बीच एक ‘भोजन बिल’ का भुगतान न करने के कारण की गई है। सरकारी तंत्र की इस लापरवाही ने जिला प्रशासन को एक असहज और शर्मनाक स्थिति में डाल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, यह विवाद काफी पुराना है। बताया जा रहा है कि सरकारी आयोजनों और चुनाव ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने वाले वेंडर का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ था। बकाया राशि लाखों में होने के कारण संबंधित पक्ष ने कई बार कलेक्ट्रेट के चक्कर काटे, लेकिन जब प्रशासनिक स्तर पर कोई समाधान नहीं निकला, तो प्रार्थी ने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट के आदेश की तामीली
माननीय न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूर्व में ही भुगतान के आदेश दिए थे। प्रशासन द्वारा समय सीमा के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी न करने पर नाराज न्यायालय ने कलेक्ट्रेट कार्यालय की चल-संपत्ति को कुर्क करने का वारंट जारी कर दिया। शुक्रवार को जब कोर्ट के कर्मचारी कुर्की की कार्रवाई के लिए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे, तो वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
प्रशासनिक साख पर सवाल
एक जिला कलेक्टर कार्यालय, जो पूरे जिले की व्यवस्था देखता है, उसकी संपत्ति की कुर्की का आदेश होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।
बजट या लापरवाही: सवाल यह उठ रहा है कि क्या विभाग के पास वास्तव में बजट का अभाव था या यह केवल फाइलों को अटकाने की प्रशासनिक सुस्ती का नतीजा है।
अधिकारियों की चुप्पी: इस घटना के बाद कलेक्ट्रेट के आला अधिकारी डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। फिलहाल कुर्की की प्रक्रिया को रोकने के लिए तत्काल भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है।
बड़ी बात: छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह विरले ही होता है जब किसी जिले के शीर्ष कार्यालय पर इस तरह की कानूनी कार्रवाई की नौबत आए। इससे पहले भी प्रदेश के कुछ अन्य विभागों में कुर्की के आदेश हुए हैं, लेकिन कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के लिए यह एक कड़ा संदेश है।

