New fitness formula : लंबी उम्र के लिए सिर्फ वॉक नहीं, वर्कआउट में लाएं ‘वैरायटी’

Versha Chouhan
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  • 30 साल की रिसर्च:  1 लाख से अधिक लोगों पर किया अध्ययन।
  • वैरायटी का महत्व: एक ही तरह की कसरत के मुकाबले अलग-अलग गतिविधियों का मिश्रण ज्यादा प्रभावी।
  • मृत्यु दर में कमी: वर्कआउट रूटीन बदलने से गंभीर बीमारियों और मौत का जोखिम कम होता है

New fitness formula : अगर आप पिछले कई सालों से फिट रहने के लिए हर सुबह सिर्फ एक ही रास्ते पर वॉक कर रहे हैं, तो रुकिए। विज्ञान अब आपकी इस आदत को चुनौती दे रहा है। एक लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, लंबी उम्र का रास्ता किसी एक कसरत से नहीं, बल्कि फिटनेस रूटीन में किए गए बदलावों (Variety) से होकर गुजरता है।

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हार्वर्ड की स्टडी: 30 साल और 1 लाख लोग

यह कोई छोटा-मोटा सर्वे नहीं है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और चीन की चोंगकिंग मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने करीब 30 साल तक 1,11,300 से ज्यादा लोगों के डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया। इस ग्रुप में 70,700 महिलाएं और 40,600 पुरुष शामिल थे।

रिसर्च की शुरुआत में सभी प्रतिभागी पूरी तरह स्वस्थ थे। उन्हें न दिल की बीमारी थी, न डायबिटीज और न ही कैंसर। तीन दशकों तक उनकी हर छोटी-बड़ी फिजिकल एक्टिविटी को ट्रैक किया गया। नतीजा चौंकाने वाला था: जो लोग अपने रूटीन में बदलाव करते रहे, वे उन लोगों से ज्यादा जिए जो सिर्फ एक ही पैटर्न पर टिके रहे।

सिर्फ समय नहीं, विविधता है असली चाबी

अध्ययन का सबसे मुख्य हिस्सा यह है कि आप जिम या पार्क में कितना समय बिताते हैं, उससे कहीं ज्यादा यह मायने रखता है कि आप वहां करते क्या हैं। रिसर्च के अनुसार:

  • रोजाना सिर्फ पैदल चलना अच्छा है, लेकिन उसके साथ हफ्ते में दो दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या योग जोड़ना कहीं बेहतर है।
  • पुरुषों का रुझान: स्टडी में पाया गया कि पुरुष अक्सर जॉगिंग और रनिंग जैसे हाई-इंटेनसिटी वर्कआउट को प्राथमिकता देते हैं।
  • महिलाओं का रुझान: महिलाओं में पैदल चलना और हल्की कसरत ज्यादा कॉमन थी।

“शारीरिक गतिविधियों का मिश्रण न केवल शरीर के अलग-अलग अंगों को सक्रिय करता है, बल्कि यह मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बूस्टर की तरह काम करता है।”
— शोध टीम का निष्कर्ष

अब आगे क्या? अपनी रूटीन को कैसे बदलें?

इस रिसर्च का मतलब यह कतई नहीं है कि आप वॉक करना छोड़ दें। बल्कि, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अपने हफ्ते को ‘मिक्स बैग’ बनाएं। उदाहरण के तौर पर, अगर आप 5 दिन वर्कआउट करते हैं, तो 2 दिन कार्डियो (वॉक/साइकिल), 2 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और 1 दिन फ्लेक्सिबिलिटी (योग) पर ध्यान दें।

यह बदलाव न केवल आपकी बोरियत खत्म करेगा, बल्कि आपकी मांसपेशियों को नए तरीके से चैलेंज भी करेगा। खेल विज्ञान की भाषा में कहें तो, शरीर को ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर निकालना ही लंबी उम्र का असली निवेश है।

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