Kharmas 2026 Rules : मांगलिक कार्यों पर क्यों लगती है रोक, जानें धार्मिक कारण

Versha Chouhan
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Kharmas 2026 Rules नई दिल्ली। हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को विशेष माना जाता है। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब उस समय को खरमास कहा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025–26 का पहला खरमास 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक रहा था। अब साल 2026 के दूसरे खरमास को लेकर लोगों में जिज्ञासा बनी हुई है।

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कब से शुरू होगा साल का दूसरा खरमास?

ज्योतिष गणना के मुताबिक, 14 मार्च 2026 को सूर्य देव मीन राशि में गोचर करेंगे। इसी दिन से दूसरे खरमास की शुरुआत होगी। यह अवधि 13 अप्रैल 2026 तक चलेगी। इस दौरान मांगलिक कार्यों को करना अशुभ माना गया है।

खरमास में क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास के दौरान कुछ कार्यों से परहेज करना चाहिए—

  • विवाह: इस अवधि में विवाह करना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में कलह और भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है।

  • गृह प्रवेश और निर्माण कार्य: खरमास में गृह प्रवेश या नया घर बनवाना अशुभ माना जाता है, इससे घर की सुख-शांति प्रभावित होती है।

  • नए कार्य की शुरुआत: इस दौरान नया व्यवसाय या कार्य शुरू करने से आर्थिक नुकसान और असफलता की आशंका रहती है।

  • मुंडन संस्कार: खरमास में मुंडन संस्कार करना भी निषिद्ध बताया गया है।

खरमास में क्या करना चाहिए?

खरमास की अवधि को दान, भक्ति और साधना के लिए उत्तम माना गया है—

  • दान-पुण्य: ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, धन और आवश्यक वस्तुओं का दान करना शुभ फल देता है।

  • सूर्य उपासना: प्रतिदिन सूर्य देव को अर्घ्य दें और सुख-शांति की कामना करें।

  • विष्णु पूजा: सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और भोग में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।

पवित्र नदी में स्नान का महत्व

खरमास के दौरान पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समय स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही नदी में दीपदान करने से भी शुभ फल की प्राप्ति होती है।

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