नई दिल्ली/इस्लामाबाद: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ‘ शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के लिए रवाना हो गए हैं। वहां वे ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे बेहद नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) को एक स्थायी शांति समझौते में बदलने के लिए आयोजित होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता का नेतृत्व करेंगे।
रवाना होने से पहले वेंस ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “अमेरिका के साथ खिलवाड़ न करें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन इस वार्ता से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद तो रखता है, लेकिन किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस्लामाबाद में ‘हाई-स्टेक’ शांति वार्ता
पाकिस्तान की मध्यस्थता में शनिवार को होने वाली यह बैठक ऐतिहासिक मानी जा रही है। जेडी वेंस के साथ इस प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुश्नर भी शामिल हैं।
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वार्ता का मुख्य उद्देश्य: पिछले दिनों हुए अस्थाई युद्धविराम को स्थायी बनाना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से खुलवाना।
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लेबनान पर विवाद: ईरान का दावा है कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, जबकि अमेरिका और इजरायल ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। इसी ‘गलतफहमी’ को दूर करना वेंस के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
वेंस का कड़ा रुख: “यह आखिरी मौका”
उपराष्ट्रपति वेंस, जो आमतौर पर विदेशी सैन्य हस्तक्षेपों के आलोचक रहे हैं, इस बार ट्रंप प्रशासन के कड़े संदेशवाहक बनकर जा रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा:
“हम ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समझना होगा कि यह समझौता उनकी ईमानदारी पर टिका है। अगर उन्होंने शर्तों का उल्लंघन किया, तो राष्ट्रपति ट्रंप सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।”

