BY यशवंत गंजीर
कुरुद। छत्तीसगढ़ विधानसभा के षष्ठम् विधानसभा के अष्टम (बजट) सत्र के समापन पर 20 मार्च को दिए गए संदेश को सार्वजनिक करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कुरुद विधायक अजय चंद्राकर की संसदीय दक्षता, तथ्यप्रधान प्रस्तुति और वैचारिक प्रखरता की सराहना की है। उन्होंने चंद्राकर के वक्तव्यों को छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास की “अनमोल ज्ञान धरोहर” बताया।
अध्यक्ष ने कहा कि स्वास्थ्यगत कारणों से हर बैठक में उपस्थित न रह पाने के बावजूद उन्होंने तकनीकी माध्यमों से सदन की कार्यवाही का लगातार अवलोकन किया। समापन अवसर पर दिए गए उनके संदेश में अजय चंद्राकर की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि चंद्राकर सदन में मुद्दों को केवल उठाते नहीं, बल्कि उन्हें गहन बौद्धिक विमर्श का स्वरूप देते हैं।
डॉ. रमन सिंह ने अपने संदेश में उल्लेख किया कि अजय चंद्राकर की भाषा में साहित्यिक सौष्ठव और तर्कों में आधुनिक दृष्टिकोण की स्पष्टता दिखाई देती है। उनके वक्तव्य केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनमें अनुभव, शोध और दूरदर्शिता का संतुलित समावेश होता है, जो सदन की कार्यवाही को अधिक प्रभावी बनाता है।
प्रश्नकाल के दौरान उनकी सक्रियता भी उल्लेखनीय रही। अध्यक्ष ने बताया कि उनके एक प्रश्न पर लगभग आधे घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, जो उनके गहन अध्ययन और ठोस तथ्यों के साथ विषय रखने की क्षमता को दर्शाता है। यह शैली न केवल लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करती है, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही को भी मजबूत बनाती है।
इस सत्र में अजय चंद्राकर ने गिग वर्कर्स, शिक्षक भर्ती, युवाओं के रोजगार, सड़क सुरक्षा और बढ़ते अपराध जैसे जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उनकी कार्यशैली, अनुशासन और नैतिक दृढ़ता नए जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका संसदीय कौशल न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण वैचारिक विरासत के रूप में देखा जाएगा।

