BY-Shailendra singh Baghel
बलरामपुर -जिले में अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार लगातार पैर पसारता जा रहा है, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। जिले के कई इलाकों में आज भी बिना अनुमति के ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं, जहां ईंटों को पकाने के लिए अवैध कोयले का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई का दावा तो करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है।

कमलापुर बना अवैध भट्ठों का केंद्र

कमलापुर बना अवैध भट्ठों का केंद्र
ताजा मामला कुशमी विकासखंड के कमलापुर गांव का है। यहां कुशमी-कोरंधा मुख्य मार्ग के किनारे करीब पांच अवैध ईंट भट्ठे खुलेआम संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन भट्ठों की जानकारी जिला प्रशासन को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इन भट्ठों से निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण को भी प्रदूषित कर रहा है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

प्रतिबंध के बावजूद जारी है संचालन

प्रतिबंध के बावजूद जारी है संचालन
जानकारों के अनुसार शासन द्वारा गमला ईंट भट्ठों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है और इसके लिए किसी प्रकार की अनुमति भी नहीं दी जाती। इसके बावजूद जिले में कई स्थानों पर ऐसे भट्ठे धड़ल्ले से चल रहे हैं। यह स्थिति प्रशासनिक निगरानी और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नियमों की खुलेआम अनदेखी के बावजूद जिम्मेदार विभाग की निष्क्रियता चिंताजनक है।
खनिज विभाग की सफाई, स्टाफ की कमी का हवाला
इस पूरे मामले में जिले का खनिज विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि, यह तर्क स्थानीय लोगों के गले नहीं उतर रहा है। उनका कहना है कि अगर प्रशासन चाहे तो सीमित संसाधनों में भी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

पहले भी हो चुका है दर्दनाक हादसा

पहले भी हो चुका है दर्दनाक हादसा
गौरतलब है कि करीब तीन वर्ष पहले कोटपाली क्षेत्र में एक अवैध ईंट भट्ठे में जलकर दो ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब फिर से उसी तरह के हालात बनते नजर आ रहे हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक दबाव में अटकी कार्रवाई?
सूत्रों के अनुसार कमलापुर में अवैध भट्ठों पर कार्रवाई के लिए कुशमी से राजस्व अमला मौके पर पहुंचा था, लेकिन कथित तौर पर राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। यदि यह आरोप सही है, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

स्थानीय लोगों में बढ़ती नाराजगी

स्थानीय लोगों में बढ़ती नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसके अलावा, इन भट्ठों में सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की जाती है, जिससे मजदूरों और आसपास के लोगों की जान जोखिम में रहती है। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की है।
कब जागेगा प्रशासन?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में पहले ही अवैध ईंट भट्ठों के कारण जानलेवा हादसा हो चुका है, तो प्रशासन कब तक केवल औपचारिक कार्रवाई करता रहेगा? क्या किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है, या फिर समय रहते सख्त कदम उठाए जाएंगे?
फिलहाल, खनिज अधिकारी ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन यह कार्रवाई कब और कितनी प्रभावी होगी, यह देखने वाली बात होगी। जिलेवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को समझते हुए जल्द ठोस और प्रभावी कदम उठाएगा, ताकि अवैध भट्ठों पर पूरी तरह रोक लग सके और भविष्य में किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
