By- Shailendra singh Baghel
बलरामपुर -जिले के रघुनाथ नगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत तुगवा गांव में वन भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को लेकर चल रहा विवाद अब आपसी सहमति और समझाइश के बाद सुलझ गया है। वन विभाग द्वारा जंगल की जमीन से 36 ग्रामीणों को बेदखली का नोटिस जारी किए जाने के बाद ग्रामीणों और वन विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समाज प्रमुखों की मौजूदगी में ग्रामीणों ने स्वेच्छा से जंगल की जमीन को खाली करने का निर्णय लिया।

बैठक के बाद तुगवा गांव से लगे जंगल की करीब पांच एकड़ वन भूमि से अवैध अतिक्रमण को ग्रामीणों द्वारा स्वयं हटा लिया गया। यह पहल न सिर्फ प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बनी, बल्कि जंगल संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी साबित हुई।

वन विभाग के अधिकारियों और समाज प्रमुखों ने बैठक के दौरान ग्रामीणों को भविष्य में वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण न करने की सख्त हिदायत दी। इसके साथ ही ग्रामीणों को जंगल की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी समझाई गई। बैठक के अंत में सभी ग्रामीणों को जंगल की रक्षा करने, पेड़ों को नुकसान न पहुंचाने और वन भूमि को सुरक्षित रखने की शपथ भी दिलाई गई।
मामले की जानकारी देते हुए वन मंडल अधिकारी आलोक बाजपेयी ने बताया कि वन विभाग द्वारा जारी नोटिस के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो सकती थी, लेकिन समाज प्रमुखों और विभागीय अधिकारियों की समझाइश से ग्रामीणों ने सहयोगात्मक रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि “तुगवा गांव से लगे जंगल की जमीन पर किया गया अवैध अतिक्रमण ग्रामीणों ने खुद ही हटा लिया है। इसके साथ ही सभी ने भविष्य में जंगल की रक्षा करने और वन भूमि पर दोबारा अतिक्रमण न करने की शपथ ली है।”
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ग्रामीणों ने भी इस दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें पहले वन कानूनों और सीमाओं की पूरी जानकारी नहीं थी। बैठक में दी गई जानकारी और समझाइश के बाद उन्होंने यह महसूस किया कि जंगल केवल सरकार की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर है, जिसकी रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।
वन विभाग ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि इसी तरह प्रशासन और ग्रामीण मिलकर काम करें, तो जंगलों को बचाना आसान हो सकता है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में वन भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन प्राथमिकता हमेशा संवाद और सहयोग के जरिए समाधान निकालने की रहेगी।
इस पूरे घटनाक्रम को क्षेत्र में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जहां टकराव की बजाय बातचीत और समझदारी से न सिर्फ समस्या का समाधान हुआ, बल्कि जंगल संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है।

