Corruption in MNREGA scheme -मनरेगा में फर्जी मजदूरों का कब्जा,,किसकी सह पर खेला गया खेल,फिर जाँच के नाम पर हीलाहवाली क्यों

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By- Shailendra Singh Baghel 

बलरामपुर -जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रहे कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिले के रामचंद्रपुर जनपद पंचायत अंतर्गत भंवरमाल गांव में नहर मरम्मत कार्य के दौरान फर्जी हाजिरी भरकर ऐसे लोगों को मजदूरी का भुगतान किया गया, जिन्होंने कभी कार्यस्थल पर काम ही नहीं किया।


ग्रामीणों के अनुसार यह मामला जल संसाधन विभाग क्रमांक-2 द्वारा दलको बांध से किसानों के खेतों तक सिंचाई सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से किए जा रहे लगभग 40 लाख रुपये की लागत वाले नहर मरम्मत कार्य से जुड़ा है। इस कार्य में रोजगार सहायक की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जी मस्टर रोल तैयार किया गया। शिकायत में बताया गया है कि गांव के कई संपन्न और प्रभावशाली लोगों के नाम मस्टर रोल में दर्ज किए गए, जबकि उन्होंने नहर निर्माण में एक दिन भी मजदूरी नहीं की।
ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी मस्टर रोल में भंवरमाल हाई स्कूल क्षेत्र के विधायक प्रतिनिधि और उनकी पत्नी, जो बैंक सखी के रूप में कार्यरत हैं, के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा पंचायत सचिव के माता-पिता, जिनकी उम्र 55 से 60 वर्ष के बीच बताई जा रही है, और अन्य कई ग्रामीणों के नाम भी मस्टर रोल में दर्ज किए गए हैं। इन सभी को मजदूरी का भुगतान कर दिया गया, जबकि वास्तविक मजदूरों में से कई को आज तक उनकी मेहनत की राशि नहीं मिल पाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना का उद्देश्य गांव के गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन भंवरमाल गांव में इस योजना का लाभ रसूखदार और संपन्न लोग फर्जी तरीके से उठा रहे हैं। इससे न केवल गरीब मजदूरों का हक मारा जा रहा है, बल्कि सरकारी धन का भी दुरुपयोग हो रहा है।


मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर के पास लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है। आरोप है कि शिकायत दिए जाने के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई अधिकारी गांव में जांच के लिए नहीं पहुंचा, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।


हालांकि जब इस संबंध में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि फर्जी मस्टर रोल को शून्य कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया था, जिसे विभागीय गलती मानते हुए अब बोर्ड लगवाने की बात कही गई है।
अब सवाल यह है कि क्या मनरेगा योजना में हुई इस गंभीर गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर राजनीतिक दबाव के चलते जांच की फाइल दबाकर दोषियों को बचा लिया जाएगा। ग्रामीणों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं और वे निष्पक्ष जांच व न्याय की मांग कर रहे हैं।

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