- बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 20 साल पुराने रामावतार जग्गी मर्डर केस में अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
- कोर्ट की सख्त टिप्पणी: बेंच ने साफ किया कि जब साक्ष्य समान हों, तो किसी भी हाई-प्रोफाइल आरोपी को स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिल सकता।
- न्याय का अंत: दो दशकों से चल रही कानूनी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है।
Chhattisgarh High Court News , बिलासपुर — छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे बड़े ‘पावर प्लेयर’ रहे अजीत जोगी के बेटे Amit Jogi ‘ के लिए कानूनी मैदान पर आज सबसे बड़ा ‘नॉकआउट’ दिन रहा। बिलासपुर हाईकोर्ट ने रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने निचली अदालत के पुराने फैसले को पलटते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि कानून की पिच पर हर खिलाड़ी समान है।
20 साल का लंबा ‘मैच’ और हाईकोर्ट का स्ट्राइक
यह मामला 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी। तब से यह केस कानूनी दांव-पेच के बीच फंसा हुआ था। आज की सुनवाई में कोर्ट ने ‘समान साक्ष्य’ के सिद्धांत पर जोर दिया।
- भेदभाव खत्म: हाईकोर्ट ने कहा कि अन्य आरोपियों को सजा मिल चुकी है, तो उन्हीं सबूतों के आधार पर अमित जोगी को अलग नहीं रखा जा सकता।
- सबूतों की ताकत: कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को सही माना कि जग्गी की हत्या की साजिश में अमित जोगी की भूमिका सक्रिय थी।
- कानूनी तर्क: बेंच ने साफ किया कि एक ही अपराध में शामिल सभी चेहरों को एक ही तराजू में तौला जाएगा।
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। अमित जोगी की लीगल टीम अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है, लेकिन फिलहाल हाईकोर्ट का यह ‘शॉट’ उनके राजनीतिक भविष्य के लिए घातक साबित हो रहा है।
“न्याय में देरी हुई, लेकिन न्याय मिला। हाईकोर्ट ने यह साबित कर दिया कि साक्ष्यों के आधार पर किसी भी रसूखदार आरोपी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। यह फैसला लोकतंत्र और कानून व्यवस्था की जीत है।”
— पीड़ित पक्ष के वकील
