धमतरी | छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी जिलों में सक्रिय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) पर केंद्रीय एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संदिग्ध विदेशी फंडिंग और उसके कथित दुरुपयोग को लेकर व्यापक जांच शुरू की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक करीब 153 संस्थाएं जांच के दायरे में हैं।
₹6.5 करोड़ की संदिग्ध निकासी पर फोकस
जांच एजेंसियों ने बस्तर-धमतरी बेल्ट में लगभग ₹6.5 करोड़ की संदिग्ध नकद निकासी चिन्हित की है। यह राशि बीते कुछ महीनों में अलग-अलग एटीएम के जरिए निकाली गई, जिससे फंड के उपयोग पर सवाल खड़े हो गए हैं।
FCRA से बचने का नया तरीका
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि विदेशी फंडिंग नियमों से बचने के लिए विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के प्रावधानों को दरकिनार किया गया। आरोप है कि ‘TTI India’ जैसी अपंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से विदेशी डेबिट कार्ड का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर नकदी निकाली गई।
नक्सल कनेक्शन की भी जांच
सुरक्षा एजेंसियां इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि कहीं इस फंड का उपयोग तथाकथित रेड कॉरिडोर में नक्सली गतिविधियों या रसद सप्लाई के लिए तो नहीं किया गया। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कई संस्थाओं पर कार्रवाई, फंडिंग रोकी गई
सूत्रों के मुताबिक, प्राथमिक जांच के आधार पर कई संदिग्ध संस्थाओं की फंडिंग पर रोक लगा दी गई है। साथ ही उनकी वैधता की भी समीक्षा की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम अवैध गतिविधियों और वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है।
> अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई “रेड कॉरिडोर” में सक्रिय संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के बड़े अभियान का हिस्सा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे तथा कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

