बलरामपुर – जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के सुरहुल गांव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी नई सड़क अब विवादों में घिर गई है। ग्रामीणों के लिए वर्षों से प्रतीक्षित यह सड़क महज 10 दिनों के भीतर ही उखड़ने लगी, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।PMGSY

10 दिन में उखड़ी सड़क, घटिया निर्माण के आरोप

10 दिन में उखड़ी सड़क, घटिया निर्माण के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई है। सड़क की परतें जगह-जगह से उखड़ रही हैं और कई हिस्सों में गड्ढे बन गए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि निर्माण कार्य में मानकों का पालन नहीं किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मजबूती के लिए जो सामग्री उपयोग होनी चाहिए थी, उसकी जगह निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया।

PMGSY पर सवाल, योजना की साख पर असर

PMGSY पर सवाल, योजना की साख पर असर
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा देना है, ताकि गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा जा सके। लेकिन सुरहुल गांव का यह मामला इस योजना की साख पर सवाल खड़ा करता है। अगर सड़कें इतनी जल्दी खराब हो जाएं, तो योजना के उद्देश्य पर ही प्रश्नचिन्ह लग जाता है।
ग्रामीण की बाईट
ग्रामीणों की टूटी उम्मीदें
सड़क बनने से पहले ग्रामीणों में काफी उत्साह था। उन्हें उम्मीद थी कि अब उनके गांव में आवागमन आसान होगा और विकास की गति तेज होगी। लेकिन सड़क के उखड़ने के बाद अब वही ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि खुला भ्रष्टाचार है।

कैमरे से बचते अधिकारी, जवाब देने से परहेज

कैमरे से बचते अधिकारी, जवाब देने से परहेज
मामले की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारी मीडिया से बचते नजर आ रहे हैं। खासकर विभाग के अधिकारी सचिता नंद कांत इस पूरे मामले में कैमरे के सामने आने से कतराते दिखाई दिए। इससे यह सवाल और गहरा जाता है कि आखिर सच्चाई क्या है और जिम्मेदारी कौन लेगा?
पहले भी लगे हैं ऐसे आरोप
यह कोई पहला मामला नहीं है जब जिले में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई जगहों पर घटिया निर्माण के आरोप लग चुके हैं। बावजूद इसके न तो विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई होती है और न ही ऐसी घटनाओं पर लगाम लग पाती है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
इस मामले में जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे यह साफ है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती दिखाने में जिम्मेदार लोग नाकाम साबित हो रहे हैं।

भ्रष्टाचार का खेल या लापरवाही?

भ्रष्टाचार का खेल या लापरवाही?
जिस तरह से सड़क इतनी जल्दी खराब हुई है, उससे यह साफ संकेत मिलता है कि निर्माण में या तो भारी लापरवाही हुई है या फिर जानबूझकर भ्रष्टाचार किया गया है। अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो ऐसे मामले आगे भी सामने आते रहेंगे।
ग्रामीणों की मांग – हो निष्पक्ष जांच
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और सड़क का पुनर्निर्माण गुणवत्ता के साथ किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सख्त निगरानी जरूरी है।
सिस्टम पर उठे सवाल
सुरहुल गांव की यह सड़क अब सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल बन गई है। जब योजनाएं कागजों में ही अच्छी दिखें और जमीन पर फेल हो जाएं, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। PMGSY
