By-Kuleshwar Kuswaha
बलरामपुर -जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपनी लंबित मांगों को लेकर 26 और 27 फरवरी 2026 को दो दिवसीय धरना प्रदर्शन करेंगी। जिले भर से लगभग 5 हजार कार्यकर्ता और सहायिकाएं इस आंदोलन में शामिल होंगी। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि इन दो दिनों तक जिले की सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में ताला लटका रहेगा और नियमित कार्य पूरी तरह से बंद रहेंगे। आंदोलन की सूचना संबंधित विभाग और प्रशासन को पहले ही दे दी गई है। प्रदर्शन के दौरान जिला मुख्यालय में ध्यान आकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा।

पूरे जिले में बंद रहेंगे आंगनवाड़ी केंद्र…
धरना के दौरान 26 एवं 27 फरवरी को जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन बंद रहेगा। इससे पोषण आहार वितरण, टीकाकरण सहयोग, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की निगरानी जैसे कार्य प्रभावित हो सकते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से मांगों को लेकर शासन-प्रशासन से गुहार लगाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
ये हैं तीन सूत्रीय प्रमुख मांगें……
1. शासकीय कर्मचारी घोषित करने की मांग
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग है कि उन्हें शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। जब तक शासकीयकरण नहीं किया जाता, तब तक कार्यकर्ताओं को 26,000 रुपये प्रतिमाह और सहायिकाओं को 22,500 रुपये प्रतिमाह जीवनयापन योग्य वेतन प्रदान किया जाए।

2. सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन व्यवस्था
दूसरी मांग के तहत मासिक पेंशन, बीमा, सेवानिवृत्ति लाभ तथा मृत्यु की स्थिति में एकमुश्त ग्रेज्यूटी राशि दिए जाने की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें सामाजिक सुरक्षा का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
3. शत-प्रतिशत पदोन्नति का प्रावधान
तीसरी मांग में सुपरवाइजर के पद पर कार्यकर्ताओं को तथा कार्यकर्ता के रिक्त पदों पर सहायिकाओं को शत-प्रतिशत पदोन्नति दिए जाने की मांग शामिल है। संगठन का कहना है कि आंतरिक पदोन्नति से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और कार्य में गुणवत्ता आएगी।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन….
दोनों दिन जिला मुख्यालय में एकत्र होकर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री एवं छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगी। आंदोलन को “ध्यान आकर्षण” कार्यक्रम का रूप दिया गया है, जिसके तहत सभी कार्य पूर्णतः बंद रखे जाएंगे। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे उग्र आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है।
प्रशासन की नजर आंदोलन पर….
जिले में लगभग 5 हजार कार्यकर्ताओं के धरने पर बैठने की घोषणा के बाद प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। दो दिवसीय बंद से ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और बाल विकास से जुड़ी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाता है और क्या कार्यकर्ताओं की मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने आता है।


