कुलेश्वर कुशवाहा
बलरामपुर। जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही कंक्रीट नहर पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। निर्माणाधीन नहर का एक हिस्सा टूट जाने के बाद पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं जल संसाधन विभाग ने तेज पानी के बहाव को नहर क्षतिग्रस्त होने का कारण बताया है और जांच के बाद मरम्मत कराने की बात कही है।
गिरवानी नहर परियोजना में हुआ नुकसान ,,,
पूरा मामला बलरामपुर जिले के रामानुजगंज विकासखंड अंतर्गत ग्राम गिरवानी का है। यहां जल संसाधन विभाग द्वारा लगभग 4 करोड़ 82 लाख रुपये की लागत से गिरवानी नहर परियोजना के तहत कंक्रीट नहर का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही पहली बारिश में नहर का एक हिस्सा टूट गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
पहली बारिश में ही खुली निर्माण की पोल ..
ग्रामीणों का कहना है कि जिस नहर से वर्षों तक किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद थी, वह पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया होता तो नहर इतनी जल्दी नहीं टूटती। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही, जिसका परिणाम पहली ही बारिश में सामने आ गया।

ग्रामीणों ने लगाया भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री का आरोप…
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही गुणवत्ता को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों को शिकायत की गई थी। उनका कहना है कि निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया और कई स्थानों पर लापरवाही बरती गई। बावजूद इसके किसी अधिकारी ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। अब नहर टूटने के बाद ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच कर कार्रवाई की जाती तो सरकारी धन की इस तरह बर्बादी नहीं होती। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कर दोषी अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और संबंधित जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि से बनने वाली परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
किसानों की बढ़ी चिंता ….
इस नहर परियोजना से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन निर्माणाधीन नहर के टूटने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय पर मरम्मत और गुणवत्ता सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में भी नहर के बार-बार क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहेगा, जिससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी और किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
विभाग ने जांच और मरम्मत का दिया भरोसा ….
मामले में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता ने कहा कि नहर के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलने के बाद विभाग द्वारा पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। उनका कहना है कि प्रारंभिक रूप से तेज पानी के बहाव के कारण नहर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच की जाएगी और जहां नुकसान हुआ है, वहां आवश्यक मरम्मत कराई जाएगी।
जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई…
फिलहाल नहर टूटने की घटना ने करोड़ों रुपये की इस परियोजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर ग्रामीण निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर विभाग तेज बहाव को इसकी वजह बता रहा है। अब सभी की निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। यदि जांच में निर्माण में अनियमितता या गुणवत्ता में कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई की मांग और तेज हो सकती है।

