By- Kuleshwar Kuswaha
बलरामपुर- जिले के जनपद पंचायत वाड्रफनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत महेवा में पंचायत निधि के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस मामले में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव रामदेव जगते पर करीब 27 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है। आरोपों के सामने आते ही पंचायत की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे राशि निकालने का आरोप …
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत निधि से विकास कार्यों के नाम पर राशि आहरित की गई, लेकिन जमीनी स्तर पर उन कार्यों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रकम निकालकर उसे निजी खाते में ट्रांसफर कराया गया। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पंचायत स्तर पर बड़े वित्तीय घोटाले का मामला साबित हो सकता है।

सरपंच पद का प्रभाव इस्तेमाल करने का आरोप…
बताया जा रहा है कि जिस समय यह वित्तीय लेन-देन हुआ, उस दौरान ग्राम पंचायत महेवा की सरपंच रामदेव जगते की पत्नी थीं। आरोप है कि इस दौरान पद के प्रभाव और अधिकारों का उपयोग कर पंचायत निधि में अनियमितताएं की गईं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

RTI से हुआ खुलासा, दस्तावेजों में सामने आईं विसंगतियां ….
पूरे मामले का खुलासा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से हुआ है। इन दस्तावेजों में कई ऐसे भुगतान और राशि हस्तांतरण दर्ज पाए गए, जिनके बदले किसी भी प्रकार के विकास कार्य के प्रमाण नहीं मिले। दस्तावेजों में सामने आई विसंगतियों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
जनपद CEO की जांच में अनियमितताओं की पुष्टि…
शिकायत के बाद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने की बात सामने आई है। इसके बाद रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है।
कार्रवाई की तैयारी, प्रशासन पर टिकी नजरें …
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
राजनीतिक माहौल गरम, पारदर्शिता पर उठे सवाल . .
इस मामले के उजागर होने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच पंचायत निधि के उपयोग और उसकी पारदर्शिता को लेकर बहस छिड़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत स्तर पर निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

