- बड़ा कदम: एअर इंडिया क्रैश के 10 महीने बाद 30 पीड़ित परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भावुक पत्र लिखा है।
- मुख्य मांग: परिवारों ने ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) का डेटा सार्वजनिक करने की अपील की है।
- मुआवजा नहीं सत्य: पीड़ितों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता वित्तीय मदद नहीं, बल्कि हादसे की असली वजह जानना है।
Air India Crash Investigation Report , अहमदाबाद — एअर इंडिया प्लेन क्रैश के 10 महीने बीत जाने के बाद भी जख्म अभी भरे नहीं हैं। शनिवार को करीब 30 पीड़ित परिवारों ने एकजुट होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में किसी मुआवजे या मदद की गुहार नहीं है, बल्कि एक कड़ा सवाल है। परिवार जानना चाहते हैं कि उस दिन आसमान में असल में क्या हुआ था? उन्होंने सीधे तौर पर फ्लाइट के ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) के डेटा को सार्वजनिक करने की मांग की है ताकि जवाबदेही तय हो सके।
सिस्टम की ‘फिल्डिंग’ पर सवाल: क्यों छिपा है डेटा?
हादसे के बाद से ही जांच एजेंसियां अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही हैं, लेकिन परिवारों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। उन्होंने इसे पारदर्शिता की कमी करार दिया है।
- 10 महीने का इंतजार: हादसे के इतने लंबे समय बाद भी जांच रिपोर्ट का ‘फाइनल स्कोर’ सार्वजनिक नहीं किया गया है।
- CVR की अहमियत: कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से यह साफ हो सकता है कि आखिरी पलों में पायलटों के बीच क्या बातचीत हुई थी।
- ब्लैक बॉक्स डेटा: तकनीकी खराबी या मानवीय भूल? ब्लैक बॉक्स का डेटा ही इस मैच का असली ‘रीप्ले’ दिखा सकता है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि प्रशासन और एयरलाइंस केवल मुआवजे की बात करके मामले को रफा-दफा करना चाहते हैं। लेकिन वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक हादसे के असली गुनहगारों या तकनीकी कमियों का पर्दाफाश नहीं हो जाता।
“हमें मुआवजा नहीं चाहिए। हमें वह सच चाहिए जो फाइलों में बंद है। 10 महीने हो गए, लेकिन हमें अभी तक नहीं बताया गया कि हमारे अपनों की जान क्यों गई। ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक करना पारदर्शिता की दिशा में पहला कदम होगा।”
— पीड़ित परिवार के प्रतिनिधि
