विशेष रिपोर्ट यशवंत गंजीर धमतरी। धमतरी जिले का सिहावा थाना इन दिनों केवल कानून की चौकसी के लिए नहीं, बल्कि अटूट आस्था और 128 साल पुरानी विरासत के लिए चर्चा में है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर यहाँ ‘रक्षक’ और ‘भक्त’ का एक ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जो पूरे छत्तीसगढ़ में मिसाल बन गया है। महाअष्टमी के दिन थाना परिसर में स्थित मां खंभेश्वरी देवी के दरबार में पुलिसकर्मियों ने पूरी निष्ठा के साथ हवन-पूजन किया और नवकन्या भोज का आयोजन कराया।
वर्दी के साथ भक्ति: जब पुलिसकर्मी बने सेवादार
सिहावा थाने की सबसे अनूठी बात यह है कि यहाँ मां की सेवा का जिम्मा किसी बाहरी पुजारी के पास नहीं, बल्कि स्वयं पुलिसकर्मियों के कंधों पर है। नवरात्रि के नौ दिनों तक कड़क अनुशासन वाली ड्यूटी के बीच पुलिस जवान पूरी विनम्रता के साथ मंदिर की व्यवस्थाओं में जुटे रहे। महाअष्टमी पर एक भावुक दृश्य तब दिखा, जब थाना स्टाफ ने अपने जूते और बेल्ट त्यागकर पूरी श्रद्धा से कन्याओं के चरण पखारे और उन्हें भोजन कराया।
1898 का वो फैसला: जब आस्था के आगे झुके अंग्रेज
इस थाने का इतिहास किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है। ब्रिटिश शासनकाल में जब सिहावा से रेलवे स्लीपरों के लिए साल की लकड़ियों की तस्करी बढ़ने लगी, तब अंग्रेजों ने वर्ष 1898 में यहाँ थाना स्थापित करने का निर्णय लिया।
ऐतिहासिक तथ्य: वर्ष 1903 में जब थाना भवन का निर्माण हुआ, तब अंग्रेजों ने भी स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान किया और मंदिर के मूल स्वरूप को नहीं छेड़ा।
कड़ी मान्यता: आज भी मंदिर में स्थापित देवी प्रतिमा को किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा स्पर्श करना वर्जित है, जिसका पालन पुलिसकर्मी और श्रद्धालु पूरी कड़ाई से करते हैं।
”यहाँ काम करना एक आध्यात्मिक अनुभव”
थाना प्रभारी निरीक्षक शरद ताम्रकार के अनुसार, उनके पूरे सेवाकाल में यह सबसे अनूठा थाना है। उन्होंने बताया कि यहाँ ड्यूटी करना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव है। मां खंभेश्वरी की कृपा से थाना परिसर का वातावरण हमेशा सकारात्मक और शांत बना रहता है, जो कठिन ड्यूटी के दौरान जवानों को मानसिक संबल प्रदान करता है।
आस्था और कर्तव्य का जीवंत उदाहरण:
सिहावा थाना आज छत्तीसगढ़ के उन चुनिंदा स्थानों में शुमार है जहाँ इतिहास की धड़कनें और आधुनिक कानून व्यवस्था एक साथ चलती हैं। 128 वर्षों की यह विरासत न केवल धमतरी जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, जहाँ वर्दी के भीतर एक संवेदनशील और आस्थावान मन भी निवास करता है।

