धमतरी।शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में अब आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच गया है। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के मार्गदर्शन में ‘सर्व शैक्षिक संगठन, जिला इकाई धमतरी’ की कर्मचारी भवन में हुई बैठक में 4 अप्रैल को राजधानी नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित महारैली में जिले से व्यापक भागीदारी का निर्णय लिया गया।
आंदोलन क्यों हो रहा है?
इस आंदोलन की मुख्य वजह टीईटी को अनिवार्य बनाने का निर्णय है। शिक्षकों का कहना है कि—
पुराने शिक्षकों पर नया नियम थोपना अन्यायपूर्ण है
वर्षों के अनुभव को नजरअंदाज किया जा रहा है
इससे हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है
शिक्षकों का सीधा सवाल है— “डिग्री है, अनुभव है, फिर परीक्षा क्यों?”
ब्लॉक स्तर पर तैयारियां तेज
25 मार्च: धमतरी ब्लॉक की बैठक
26 मार्च (सुबह 11 बजे): कुरूद, मगरलोड और नगरी ब्लॉक में बैठक
इन बैठकों में आंदोलन की रूपरेखा और भागीदारी तय की जाएगी।
आंदोलन की रूपरेखा
हर ब्लॉक से एक-एक बस के जरिए शिक्षक दिल्ली रवाना होंगे
कलेक्टर, DEO और BEO को पूर्व सूचना दी जाएगी
सभी शिक्षक 4 अप्रैल को आकस्मिक अवकाश लेकर शामिल होंगे
रामलीला मैदान के बाद संसद की ओर कूच की तैयारी
प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति
बैठक में ममता खालसा, चंदूलाल चंद्राकर, अमित महोबे, दौलत राम ध्रुव, डेवेश साहू, दिनेश पाण्डेय, ममता ठाकुर, ए पी साहू, प्रदीप सिन्हा, नन्द किशोर साहू सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
संघर्ष जारी रहेगा
बैठक के अंत में शिक्षकों ने माँ कर्म जयंती, चैत्र नवरात्र, हिंदू नववर्ष एवं रामनवमी की शुभकामनाएँ देते हुए संकल्प लिया कि जब तक सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।
4 अप्रैल पर टिकी नजरें
अब 4 अप्रैल को दिल्ली में होने वाला यह आंदोलन शिक्षकों के भविष्य और सम्मान की दिशा तय करेगा। यह विरोध नहीं, बल्कि अधिकारों की निर्णायक लड़ाई बन चुका है।

