विशेष- रिपोर्ट यशवंत गंजीर धमतरी*
धमतरी जिले के वनांचल सिहावा-नगरी में इन दिनों ‘अफीम’ की कथित खेती को लेकर दावों और प्रतिदावों का दौर जारी है। इस पूरे विवाद का सूत्रपात पूर्व मुख्यमंत्री के एक हालिया बयान और कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित उन खबरों से हुआ, जिनमें भाजपा नेता के फार्म हाउस पर आधी रात को जेसीबी चलाकर साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई गई थी। इन खबरों ने जहाँ विपक्ष और स्थानीय संगठनों को आंदोलित कर दिया है, वहीं सत्ता पक्ष और प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है।
खबरों और बयानों से उपजा ‘सस्पेंस’
विवाद की जड़ें उन मीडिया रिपोर्ट्स में हैं, जिनमें दावा किया गया था कि नगरी क्षेत्र में सब्जी की आड़ में प्रतिबंधित फसल उगाई जा रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
आरोप:
- छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (JCP) का आरोप है कि जांच की भनक लगते ही रातों-रात खेतों को जेसीबी से जोत दिया गया ताकि कोई वैज्ञानिक प्रमाण न बचे।
- जनप्रतिनिधियों की राय:* पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव और जनपद सदस्य प्रमोद कुंजाम ने भी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए इन आशंकाओं की उच्चस्तरीय जांच को जरूरी बताया है।
- भाजपा का पलटवार: “किसानों की साख पर हमला”*
इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष प्रकाश बैस ने कहा कि सिहावा-नगरी क्षेत्र अपनी ‘दुबराज’ किस्म के धान और उन्नत सब्जी उत्पादन के लिए विख्यात है। उन्होंने इन खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह केवल एक काल्पनिक विवाद है जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
प्रशासनिक सर्वे: “जिले में कहीं नहीं मिली अवैध खेती”*
विवाद बढ़ने पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर राजस्व विभाग ने पूरे जिले में सघन सर्वे अभियान चलाया। अपर कलेक्टर इंदिरा देवहारी और मनोज मरकाम की टीम ने भौतिक सत्यापन के बाद स्पष्ट किया है कि जिले में कहीं भी अफीम की खेती के प्रमाण नहीं मिले हैं। प्रशासन ने “जीरो टॉलरेंस” का हवाला देते हुए जिले को इस मामले में पूरी तरह ‘क्लीन चिट’ दे दी है।
संगठनों की चेतावनी: “कागजी नहीं, जमीनी जांच हो”*
प्रशासनिक रिपोर्ट के बावजूद, JCP अध्यक्ष निखलेश देवान ने कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि जिस भूमि पर जेसीबी चली थी, उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जाए। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय सीमा के भीतर इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
फिलहाल प्रशासनिक रिकॉर्ड में धमतरी जिला ‘अफीम मुक्त’ है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और स्थानीय चर्चाओं ने मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन सवालों का जवाब ठोस जांच के जरिए देता है या यह मामला सियासी बहस तक ही सीमित रह जाता है।
