यशवंत गंजीर कुरुद/रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र इस बार केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं रहा, बल्कि यह विधायकों के राजनीतिक तेवर और जनता के मुद्दों के प्रति उनकी गंभीरता की कसौटी भी बना। सवालों की इस ‘जंग’ में 29 दिग्गजों ने 56-56 सवालों की झड़ी लगाकर अपनी सक्रियता का लोहा मनवाया। वहीं, कुछ चेहरों की चुप्पी ने सदन में कई नए सवाल खड़े कर दिए।
अजय चंद्राकर का ‘फायर ब्रांड’ अवतार:
सत्र के दौरान कई विधायक भले ही संख्या बल में पीछे रहे, लेकिन उनके तेवर बेहद तल्ख नजर आए। सत्ता पक्ष के अजय चंद्राकर ने तो जैसे सवालों को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया। आक्रामक अंदाज और पूरे 56 सवालों के साथ वे सदन के असली ‘फायर ब्रांड’ बनकर उभरे।
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आंकड़ों का ‘परफेक्ट स्कोर’
23 फरवरी से 20 मार्च तक चले इस सत्र में कुल 15 बैठकें हुईं और 14 दिन प्रश्नकाल चला। प्रतिदिन 4 सवालों की निर्धारित सीमा के अनुसार अधिकतम 56 सवालों का ‘परफेक्ट स्कोर’ तय था। 29 विधायकों ने इस लक्ष्य को हासिल किया। दिलचस्प बात यह है कि इन टॉपर्स में विपक्ष के 21 और सत्ता पक्ष के केवल 8 विधायक शामिल हैं।
नए चेहरों का दबदबा, अनुभव पड़ा फीका:
सदन की कार्यवाही ने एक नई कहानी बयां की है। जहां नए विधायक अपने क्षेत्र की आवाज बुलंद करने में आगे दिखे, वहीं कई अनुभवी चेहरे सवाल पूछने की दौड़ में पीछे छूट गए। ऐसा लगा मानो चुनावी जोश ने पुराने अनुभव को पीछे छोड़ दिया हो या फिर रणनीति के तहत वरिष्ठों ने चुप्पी साध ली हो।
सवालों के शिकन्दर में प्रमुख नाम:
इंद्र कुमार साव, मोतीलाल साहू, अंबिका मरकाम, संदीप साहू, ओंकार साहू, कुंवर सिंह निषाद, भावना बोहरा, यशोदा निलांबर वर्मा, हर्षिता स्वामी बघेल, दलेश्वर साहू, भोलाराम साहू, इंद्रसाव मंडावी, सावित्री मनोज मंडावी और लखेश्वर बघेल जैसे नाम इस सूची में प्रमुखता से चमके।
भूपेश बघेल: तेवर गरम, आंकड़े नरम:
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भले ही 41 सवालों के आंकड़े तक सीमित रहे, लेकिन उनका आक्रामक अंदाज पूरे सत्र में चर्चा का विषय बना रहा। उन्होंने मुख्य सवालों के साथ-साथ ‘पूरक सवालों’ के जरिए सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दूसरी ओर, धरमजीत सिंह ने 52 सवाल पूछकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
राजधानी रायपुर के रणबांकुरे:
रायपुर के सियासी मैदान में भी मुकाबला रोचक रहा। राजेश मूणत ने जहां 39 सवाल दागे, वहीं पुरंदर मिश्रा और अनुज शर्मा 41-41 सवालों के साथ बराबरी पर रहे।
एक नजर में सत्र का रिपोर्ट कार्ड:
| विवरण | संख्या/जानकारी |
|—|—|
| कुल बैठकें | 15 |
| प्रश्नकाल | 14 दिन |
| प्रतिदिन सवाल सीमा | 04 |
| अधिकतम सवाल क्षमता | 56 |
| 56/56 का आंकड़ा छूने वाले | 29 विधायक |
यह सत्र केवल विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जन-प्रतिनिधियों की सक्रियता का आईना साबित हुआ। जहां कुछ ने अपनी धारदार दलीलों से सत्ता को झकझोरा, तो कुछ की खामोशी खुद एक बड़ा सवाल बनकर रह गई।

