विशेष रिपोर्ट यशवंत गंजीर धमतरी। छत्तीसगढ़ के वनांचलों में रची-बसी देवी शक्ति की गाथाएं आज भी जनमानस के लिए कौतूहल और अगाध श्रद्धा का विषय हैं। इसी क्रम में धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक स्थित मोहेरा पंचायत की दुर्गम पहाड़ियों पर विराजमान मां निरई माता का दरबार एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहा है। चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को वर्ष में केवल एक बार, मात्र 5 घंटों (प्रातः 4 से 9 बजे) के लिए इस सिद्ध पीठ के कपाट खुलेंगे।

दिव्य ज्योति और अनूठी वर्जनाएं
घने जंगलों के मध्य स्थित इस मंदिर की ख्याति उसके रहस्यों में छिपी है। मान्यता है कि यहां चैत्र नवरात्रि के दौरान माता की ज्योति बिना किसी तेल या घी के स्वतः प्रज्वलित होती है और नौ दिनों तक अनवरत जलती रहती है। इस चमत्कार का वैज्ञानिक आधार भले ही अज्ञात हो, किंतु भक्तों के लिए यह माता की प्रत्यक्ष शक्ति का प्रमाण है। प्राचीन जनश्रुति के अनुसार, माता की इच्छा का मान रखते हुए आज भी यहां महिलाओं का प्रवेश पूर्णतः वर्जित है। भक्त इसे माता की आज्ञा मानकर पूरी श्रद्धा से पालन करते हैं।
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वर्जनाओं के पीछे का पौराणिक संदर्भ
लोक मान्यताओं के अनुसार, सदियों पूर्व माता अपने अनन्य भक्त ‘पुजारी बैगा’ की सेवा से प्रसन्न होकर उसे मातृत्व स्नेह दिया करती थीं। जनश्रुति है कि एक आकस्मिक घटना और बैगा की पत्नी के संदेह के कारण माता रुष्ट हो गईं और उन्होंने स्वयं को लोक-चक्षुओं से ओझल कर लिया। माता की इच्छा का सम्मान करते हुए आज भी यहाँ महिलाओं का प्रवेश पूर्णतः वर्जित है। यहाँ केवल पुरुष ही गर्भगृह तक जाकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

हजारों बकरों की बलि: आस्था की प्राचीन परंपरा
मां निरई माता के इस दरबार में सादगी और कठोर परंपराओं का अनूठा मेल देखने को मिलता है। जहां एक ओर यहां सिंदूर, कुमकुम और श्रृंगार सामग्री चढ़ाना वर्जित है, वहीं दूसरी ओर मन्नत पूरी होने पर हजारों की संख्या में बकरों की बलि देने की पुरातन परंपरा है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि बलि अर्पित करने से माता प्रसन्न होकर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि इस विशेष अवसर पर बलि की रस्म निभाने के लिए दूर-दराज से हजारों ग्रामीण अपनी भेंट लेकर यहां पहुंचते हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी और व्यवस्थाएं
आगामी दर्शन लाभ और भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। हाल ही में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्वयं इस दुर्गम स्थल का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु:
पथरीले और दुर्गम मार्गों के सुधारीकरण एवं सीमेंटीकरण।
पेयजल, पार्किंग और प्रकाश व्यवस्था के लिए हाई मास्ट लाइट की स्थापना।
सुरक्षा के कड़े प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, भक्तों का अटूट विश्वास उन्हें इस शिखर तक खींच लाता है। कल जब भोर की पहली किरण निरई की पहाड़ियों को छुएगी, तब हजारों श्रद्धालु ‘जय माता दी’ के उद्घोष के साथ इस अद्वितीय चमत्कार के साक्षी बनेंगे।

