By-Kuleshwar Kuswaha
बलरामपुर। जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सोनहत में जल संसाधन विभाग के तहत चल रहे नहर खुदाई और निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां ठेकेदार द्वारा नाबालिग स्कूली बच्चों से मजदूरी कराए जाने का मामला उजागर हुआ है। बताया जा रहा है कि बच्चों को 300 रुपये मजदूरी का लालच देकर नहर निर्माण के काम में लगाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार वाड्रफनगर ब्लॉक के सोनहत पंचायत में जिन बच्चों से काम कराया जा रहा है वे स्कूल जाने की उम्र के हैं, लेकिन आर्थिक मजबूरी और ठेकेदार के लालच के कारण उन्हें नहर की खुदाई और मिट्टी ढोने जैसे कामों में लगा दिया गया है। यह मामला सामने आने के बाद जल संसाधन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

विभाग की निगरानी पर उठ रहे सवाल….
नहर निर्माण जैसे तकनीकी कार्यों में विभाग की ओर से साइट पर इंजीनियर या जिम्मेदार अधिकारी की निगरानी होना आवश्यक होता है। लेकिन सोनहत गांव में चल रहे इस निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की इंजीनियरिंग निगरानी नजर नहीं आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि साइट पर इंजीनियर या विभागीय अधिकारी मौजूद रहते तो नाबालिग बच्चों से काम कराने जैसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। इससे साफ जाहिर होता है कि जल संसाधन विभाग की ओर से काम की सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है।
विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों का हो रहा शोषण…
जानकारी के अनुसार नहर निर्माण कार्य में लगे अधिकांश बच्चे विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) वर्ग से आते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को मजदूरी का लालच देकर काम कराया जा रहा है।
यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि एक ओर सरकार जनजातीय समाज के विकास और बच्चों की शिक्षा को लेकर कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं समुदायों के बच्चों से मजदूरी कराए जाने का मामला सामने आ रहा है।
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300 रुपये मजदूरी का लालच देकर कराया जा रहा काम ….
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार बच्चों को प्रतिदिन 300 रुपये देने का लालच देता है। इसी कारण बच्चे स्कूल जाने के बजाय मजदूरी करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। नहर की खुदाई जैसे कठिन कार्य में बच्चों को लगाना सीधे तौर पर बाल श्रम कानून का उल्लंघन माना जाता है।
इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
सरकार और विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल …..
इस पूरे मामले ने सरकार और जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार बाल श्रम रोकने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर विभागीय कार्यों में ही नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया तो बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा और ठेकेदारों की मनमानी इसी तरह जारी रहेगी।
जांच और सख्त कार्रवाई की मांग ….
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नाबालिग बच्चों से काम कराने वाले ठेकेदार और लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाता है तो यह घटना सरकार की योजनाओं और दावों पर बड़ा सवाल बनकर सामने आएगी।

