Lok Sabha Uproar : संसद में घमासान स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, 118 सांसदों ने सौंपे हस्ताक्षर

Versha Chouhan
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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के 10वें दिन मंगलवार (10 फरवरी 2026) को भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया। कांग्रेस के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन के विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया है। इस नोटिस पर 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि सदन के संचालन के दौरान स्पीकर का व्यवहार पक्षपातपूर्ण रहा है।

हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित

मंगलवार सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष ने जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग थी कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने दिया जाए। हंगामे को देखते हुए पीसी मोहन, जो उस समय चेयर पर मौजूद थे, ने सदन को पहले 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

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अविश्वास प्रस्ताव के मुख्य कारण

विपक्षी सांसदों ने नियम 94(C) के तहत यह नोटिस दिया है। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित शिकायतें दर्ज की गई हैं:

  1. नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना: विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान अपनी बात पूरी नहीं करने दी गई।

  2. सांसदों का निलंबन: हाल ही में 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन को विपक्ष ने “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया है।

  3. पक्षपात का आरोप: नोटिस में कहा गया है कि सत्तापक्ष के सदस्यों को खुली छूट दी जा रही है, जबकि विपक्षी नेताओं की आवाज दबाई जा रही है।

  4. महिला सांसदों पर टिप्पणी: विपक्षी नेताओं ने स्पीकर द्वारा कांग्रेस की महिला सांसदों पर की गई हालिया टिप्पणियों पर भी कड़ा एतराज जताया है।

महासचिव को सौंपा गया नोटिस

कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई और मुख्य सचेतक के. सुरेश ने दोपहर 1:14 बजे लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को यह औपचारिक नोटिस सौंपा। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने फिलहाल इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन वे मुद्दों पर विपक्ष के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

अब आगे क्या होगा?

संसदीय नियमों के अनुसार, स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कम से कम 14 दिनों का नोटिस अनिवार्य है। इसके बाद ही सदन में इस पर चर्चा और मतदान हो सकता है। फिलहाल, स्पीकर ओम बिरला ने सचिवालय को निर्देश दिया है कि वे इस नोटिस की जांच करें और प्रक्रिया को नियमों के अनुसार आगे बढ़ाएं।

“चेयर का काम निष्पक्ष रहना है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से विपक्ष की आवाज को अनसुना किया जा रहा है। हमारे पास 118 सांसदों का समर्थन है और हम इस पक्षपात के खिलाफ लड़ेंगे।” — गौरव गोगोई, कांग्रेस सांसद

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