BY- CG Desk
बलरामपुर.30 लाख रुपये से अधिक के कथित शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़े मामले में वाड्रफनगर जनपद पंचायत की पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व सीईओ ज्योति बबली कुजूर द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किए जाने संबंधी दायर याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब पूरे मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।
यह मामला वाड्रफनगर-बसंतपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां पुलिस ने वर्ष 2020 में पूर्व सीईओ के खिलाफ फर्जी वर्क ऑर्डर जारी कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप लगाते हुए अपराध दर्ज किया था। आरोप है कि जनपद पंचायत में पदस्थापना के दौरान करीब 30 लाख रुपये से अधिक की राशि का दुरुपयोग किया गया।
गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला
पुलिस द्वारा दर्ज प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 420, 409 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 (1) (a) एवं धारा 13 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस ने मामले की विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में चालान भी प्रस्तुत कर दिया है।
डिप्टी कलेक्टर रहते मिला था सीईओ का प्रभार.

जानकारी के अनुसार, जिस समय यह कथित घटना हुई, उस दौरान ज्योति बबली कुजूर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ थीं। कलेक्टर द्वारा किए गए कार्य विभाजन के तहत उन्हें वाड्रफनगर जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
पूर्व सीईओ की ओर से हाईकोर्ट में दायर.
याचिका में यह तर्क दिया गया कि वाड्रफनगर के तत्कालीन एसडीओपी से व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि विभागीय जांच पूरी हो चुकी है, ऐसे में आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना न्यायसंगत नहीं है और एफआईआर को रद्द किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार..
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा एवं न्यायमूर्ति की द्वैधपीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुना। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ वेद प्रकाश पांडेय की शिकायत के आधार पर अपराध दर्ज किया गया है और याचिका में उठाए गए सभी तर्क साक्ष्यों से जुड़े हुए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों का परीक्षण और उनके आधार पर निर्णय लेना ट्रायल कोर्ट का कार्य है। इस स्तर पर एफआईआर को रद्द करने का कोई ठोस और पर्याप्त आधार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है।
ट्रायल कोर्ट में होगा अब फैसला..
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि मामले का अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाएगा। इसी आधार पर एफआईआर रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया गया।
2020 में दर्ज हुआ था अपराध..
गौरतलब है कि पूर्व सीईओ के खिलाफ 30 अप्रैल 2020 को बसंतपुर पुलिस ने अपराध दर्ज किया था। विभागीय जांच पूरी होने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग से अभियोजन की अनुमति प्राप्त की गई, जिसके पश्चात पुलिस ने न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में प्रारंभिक स्तर पर न्यायालय हस्तक्षेप करने से परहेज करता है और तथ्यों की पूरी जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है।

