यशवंत गंजीर, धमतरी। छत्तीसगढ़ का प्रमुख जिला धमतरी 6 जुलाई 1998 को तत्कालीन रायपुर जिले से पृथक होकर अस्तित्व में आया। स्थापना के 28 वर्ष पूरे करने वाला यह जिला आज कृषि, सिंचाई, शिक्षा, पर्यटन, शहरी विकास और जनभागीदारी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। उपजाऊ भूमि, विशाल सिंचाई परियोजनाओं और समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के कारण धमतरी को जलाशयों की नगरी और धान का कटोरा कहा जाता है। धमतरी का ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है। माना जाता है कि इसका नाम “धम्म” और “तराई” शब्दों से मिलकर बना है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कंडेल नहर सत्याग्रह ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, जबकि सिहावा पर्वत महानदी के उद्गम स्थल और पंडित रविशंकर शुक्ल की कर्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है।
सिंचाई और कृषि ने बदली तस्वीर
जिला बनने के बाद सिंचाई के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ। गंगरेल (रविशंकर सागर) बांध, रुद्री बैराज, दुधावा, सोंढूर तथा माडमसिल्ली जैसी परियोजनाओं ने न केवल धमतरी बल्कि रायपुर और भिलाई तक पेयजल एवं सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया। इसके परिणामस्वरूप धमतरी प्रदेश के सर्वाधिक सिंचित जिलों में शामिल हुआ और धान उत्पादन के साथ आधुनिक राइस मिल उद्योग का बड़ा केंद्र बनकर उभरा। आज जिले की कृषि अर्थव्यवस्था इन परियोजनाओं के दम पर नई ऊंचाइयों तक पहुंच चुकी है।
शहरीकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य का विस्तार
पिछले 28 वर्षों में शहरी विकास ने भी रफ्तार पकड़ी है। कुरुद नगर पालिका परिषद के रूप में विकसित हुआ, जबकि नगरी, मगरलोड और भखारा नगर पंचायत के रूप में स्थानीय विकास की नई मिसाल बने हैं। शिक्षा के क्षेत्र में शासकीय महाविद्यालय, तकनीकी संस्थान, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और नर्सिंग कॉलेजों का विस्तार हुआ है। वहीं जिला अस्पताल तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं का निरंतर विस्तार कर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया है।
पर्यटन और वनांचल को मिली नई पहचान
प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक विरासत से समृद्ध धमतरी पर्यटन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सिहावा, गंगरेल जलाशय, कर्णेश्वर धाम और सीता नदी अभयारण्य जिले के प्रमुख आकर्षण हैं। सीता नदी क्षेत्र को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से पर्यटन की संभावनाएं और बढ़ी हैं। वहीं नगरी और मगरलोड के वनांचल क्षेत्रों में महुआ, इमली, चिरौंजी जैसी लघु वनोपज आधारित आजीविका ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की है।
राजनीतिक नेतृत्व और विकास की दिशा
धमतरी जिले की तीन विधानसभा सीटें—धमतरी, कुरुद और सिहावा—प्रदेश की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल हैं। पिछले 28 वर्षों में कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यकाल में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया। धमतरी विधानसभा में शहरी अधोसंरचना, गौरव पथ, खेल सुविधाओं, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ। कुरुद विधानसभा में सिंचाई नेटवर्क, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, अस्पताल और खेल सुविधाओं के विकास ने नई पहचान बनाई। वहीं सिहावा विधानसभा में वनांचल क्षेत्रों की सड़कें, आदिवासी विकास, कर्णेश्वर धाम और राम वन गमन पथ से जुड़े कार्यों को गति मिली।
बढ़ती आबादी और भविष्य की चुनौतियां
जनगणना 2011 के अनुसार जिले की आबादी 7 लाख 99 हजार 781 थी, जो वर्तमान में अनुमानित रूप से 9 लाख से अधिक हो चुकी है। इसके साथ ही जिले के सामने नई चुनौतियां भी उभरकर आई हैं। स्थानीय स्तर पर मेडिकल कॉलेज, बड़े तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थानों की जरूरत महसूस की जा रही है। गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। कृषि में धान पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए फूड प्रोसेसिंग उद्योग, कोल्ड स्टोरेज और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। नगरी और मगरलोड के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, मोबाइल नेटवर्क, पेयजल और रोजगार के अवसर बढ़ाना समय की मांग है।
नई उड़ान की ओर बढ़ता धमतरी
28 वर्षों की इस विकास यात्रा में धमतरी ने अपनी ऐतिहासिक विरासत, कृषि प्रधान पहचान और प्राकृतिक संपदा को सहेजते हुए आधुनिक विकास की दिशा में उल्लेखनीय कदम बढ़ाए हैं। योजनाबद्ध निवेश, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, उद्योगों के विस्तार और पर्यटन विकास के साथ धमतरी आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के अग्रणी जिलों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने की क्षमता रखता है।

