नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रत्येक तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। इन्हीं में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षभर में कुल 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं, लेकिन इनमें सबसे कठिन और श्रेष्ठ व्रत निर्जला एकादशी को माना गया है।
निर्जला एकादशी को लेकर मान्यता है कि इस एक व्रत को विधिपूर्वक करने से पूरे वर्ष की 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है। यही कारण है कि इसे सनातन परंपरा में अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी व्रत माना जाता है।
निर्जला एकादशी का महत्व क्यों है खास?
जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ‘निर्जला’ का अर्थ है बिना जल के। इस व्रत में साधक को न केवल अन्न का त्याग करना होता है, बल्कि पूरे दिन जल ग्रहण भी नहीं करना होता। ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी और तपती लू के बीच यह व्रत व्यक्ति के संयम, तप और आत्मनियंत्रण की कठिन परीक्षा माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस कठिन व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करता है, उसे पूरे वर्ष के सभी एकादशी व्रतों के समान पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि इसे एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
धार्मिक मान्यता और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, निर्जला एकादशी केवल उपवास नहीं बल्कि आत्मसंयम और भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक है। यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
इस वर्ष कब है निर्जला एकादशी?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून को शाम 6:12 बजे से शुरू होकर 25 जून रात 8:09 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून (गुरुवार) को रखा जाएगा।
इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना कर व्रत रखते हैं और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है।

