कटनी। कटनी पुलिस की ईमानदार छवि इस समय दागदार हो चली है। ईमानदारी अब कटनी पुलिस से अपना दमन छुड़ाकर कहीं दूर निकल गई है। आए दिन जिले में उजागर होते मामले और मामलों में हो रही कार्यवाहियां भी अजीब है। कभी कार्यवाहियों का डंका बजाकर छवि सुधारने का प्रयास करने वाले कटनी पुलिस के अधिकारी क्या वाकई में वैसे ही है जैसा वे दिखाते है, या फिर इसके भी दो मायने है। इस बात की चर्चा अब डिपार्टमेंट के अंदर ही होने लगी है। जिले के पुलिस कर्मियों को अब यह चिंता सताने लगी है, कि कटनी पुलिस में काम करना इन दिनों आसान नहीं। कोई भरोसा नहीं, किसके दामन के दाग के लिए, किसको जिम्मेदार ठहराकर, किसके ऊपर कार्यवाही कर दी जाए। विभागीय कर्मचारियों की यह चिंता जायज भी लगती है। क्योंकि बीते दिनों हुआ ही कुछ ऐसा। अब यह चर्चा विभागीय कार्यवाहियों के अंदर क्यों शुरू हुई उसकी वजह हम आपको बताते हैं।
केश नंबर एक
लगभग डेढ़ माह पूर्व कटनी पुलिस अधीक्षक के द्वारा गठित दो महिला अधिकारियों की विशेष टीम ने बहोरीबंद में फिल्मी अंदाज में कार्यवाही करते हुए सड़क पर एक आरक्षक को ट्रैक्टर चालक से 500 रुपए रिश्वत लेते पकड़ा। उसके बाद कार्यवाही करते हुए तत्काल पुलिस अधीक्षक श्री विश्वकर्मा के द्वारा बहोरीबंद थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया गया। इस कार्यवाही का गुणगान करते हुए पुलिस ने यह प्रदर्शित किया कि अब अगर ऐसा भ्रष्टाचार हुआ तो फिर ऐसी ही कार्यवाही जरूर होगी। पुलिस की इस कार्यवाही से हम सहमत भी हैं कार्यवाही ऐसी ही होनी चाहिए।
केस नंबर दो
लगभग एक माह पूर्व इंदिरा नगर में देर रात बारातियों के द्वारा उपद्रव मचाने पर वहां स्थिति संभालने पहुंचे पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे दो एसआई वीडियो में लाठी चलाते दिखाई दिए। उसमें से एक एसआई तो ऐसा था जो कि अपना थाना क्षेत्र छोड़कर पुलिस कंट्रोल रूम की सूचना पर दूसरे थाना क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित करने पहुंचा था। लेकिन उसके बाद जब वीडियो वायरल हुआ और राजनैतिक दबाव पड़ा, तो दबाव में आकर उन दोनों एसआइयो के साथ कुछ अन्य पुलिस कर्मियों को तत्काल लाइन हाजिर करने के आदेश जारी कर दिए गए। यानी आदेश का पालन करना इन्हें महंगा पड़ गया
केस नंबर तीन
विगत दिवस स्लीमनाबाद थाने में पदस्थ कार्यवाहक उपनिरीक्षक संतोष बड़गैया पर एक आवेदन की पावती देने के एवज में पैसों की मांग किए जाने के आरोप लगे। रुपए की मांग करने के ऑडियो जब सामने आए तो पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाही करते हुए एसआई को लाइन अटैच कर दिया। यह भी बातें सामने आई की जिस समय यह पूरा घटनाक्रम हुआ, उस वक्त थाना प्रभारी थाने में ही मौजूद थे। अब ऐसे में यह सवाल अगर कोई पूछे कि आखिर थाने के अंदर रुपयो के लेनदेन में थाना प्रभारी की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई, तो क्या यह गलत है। आखिर इसी अनुभाग में जब एक आरक्षक को फिल्मी अंदाज में रुपए लेते स्टिंग ऑपरेशन के जरिए पकड़ा जाए और जिम्मेदारी थाना प्रभारी की तय कर दी जाए तो फिर थाने के अंदर जब रुपयों का लेनदेन हो रहा था तो फिर थाना प्रभारी की जिम्मेदारी क्यों नहीं।
सब मन माफिक
तो आपने देखा कि कैसे इन दिनों कटनी पुलिस अपनी ही कार्यवाहियों से अपने ही डिपार्टमेंट के कर्मचारियों का मनोबल किस तरह तोड़ रही है। इस तरह की अनोखी कार्यवाही के जरिए प्रदेश भर में एक अलग कीर्तिमान स्थापित कर रही है। अब ऐसे में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था पर इसका असर पड़ना लाजमी है। शायद ऐसा लगता है कि कटनी पुलिस अब अंतर द्वंद्व से जूझ रही है। विभाग के अंदर उत्पन्न हो रही इन समस्याओं का असर कानून व्यवस्था पर पड़ेगा ही, जिसके परिणाम आने वाले समय में जरूर देखने को मिलेंगे। बाकी जो है सो तो है ही….

