यशवंत गंजीर | छत्तीसगढ़ में एक तरफ जहां प्रदेश सरकार के ‘सुशासन तिहार’ की धूम मची हुई है, वहीं दूसरी तरफ सूबे के सियासी गलियारों में एक बड़ी हलचल ने एंट्री ले ली है। चर्चाएं गर्म हैं कि सुशासन तिहार के तुरन्त बाद भाजपा संगठन और राज्य मंत्रिमंडल में एक बड़ा फेरबदल (मेगा रीशफल) हो सकता है। इस पूरी हलचल के केंद्र में हैं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा, जिन्हें लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की राष्ट्रीय कमान सौंपी जा सकती है। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल चर्चा पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
क्यों उठ रही हैं राष्ट्रीय जिम्मेदारी की अटकलें?:
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो भाजपा आलाकमान आगामी चुनावी रणनीतियों और संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए देश के कुछ चुनिंदा और असरदार चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर आगे लाने की तैयारी में है। संगठन और सरकार दोनों में विजय शर्मा के काम करने के अंदाज को देखते हुए ही उनका नाम दिल्ली की रेस में सबसे आगे चल रहा है। वैसे भी, संगठनात्मक बदलाव भाजपा की कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं, लेकिन इस बार का कयास बेहद दिलचस्प है।
युवा मोर्चा से पुराना और गहरा नाता:
विजय शर्मा के लिए भाजयुमो की कमान संभालना कोई नया अनुभव नहीं होगा। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर इसी युवा मोर्चा के इर्द-गिर्द आगे बढ़ा है। वे पहले भी छत्तीसगढ़ भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा के प्रदेश महामंत्री के रूप में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत कर चुके हैं। वर्तमान में वे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ गृह और जेल विभाग जैसे बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मोर्चे संभाल रहे हैं।
कवर्धा के ‘जायंट किलर’ और कड़क शैक्षणिक प्रोफाइल:
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में विजय शर्मा ने कवर्धा सीट पर कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक को करीब 40,000 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त देकर सबको चौंका दिया था। इसी ‘जायंट किलर’ वाली छवि ने उन्हें सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाया। राजनीति के दांव-पेंच के अलावा वे एक बेहद पढ़े-लिखे नेता भी हैं; उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से भौतिकी (Physics) में एमएससी और मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से एमसीए (MCA) की डिग्री ली है।
फिलहाल, छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन तिहार’ के रंग-बिरंगे कार्यक्रमों के साथ-साथ इस संभावित सियासी फेरबदल के सस्पेंस ने राजनीति का पारा बढ़ा दिया है। अब देखना यह है कि क्या छत्तीसगढ़ से निकला यह युवा और प्रखर चेहरा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति की नई पिच पर बल्लेबाजी करता नजर आएगा या नहीं।

