यशवंत गंजीर धमतरी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के वर्ष 2024-25 बैच के 50 भारतीय वन सेवा (IFS) प्रशिक्षु अधिकारियों ने धमतरी वनमंडल में आयोजित 10 दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। 12 से 22 मई तक चले इस विशेष फील्ड अभ्यास में अधिकारियों ने वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जल संवर्धन और जनसहभागिता आधारित वन संरक्षण की जमीनी प्रक्रियाओं को करीब से समझा।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने केरेगांव, उत्तर सिंगपुर, बिरगुड़ी, दुगली और नगरी वन परिक्षेत्रों का भ्रमण कर सागौन एवं बांस वृक्षारोपण, ग्रिड सर्वे, सैंपल प्लॉट डेटा संकलन और क्षतिग्रस्त वनों के पुनर्वास संबंधी गतिविधियों का अध्ययन किया। नगरी क्षेत्र में बहुमूल्य साल वनों के संरक्षण और आधुनिक वन सर्वेक्षण तकनीकों की व्यवहारिक जानकारी भी दी गई। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप वन प्रबंधन रणनीतियों पर विशेष फोकस रखा गया।
प्रशिक्षु अधिकारियों ने तुमड़ाबहार, खिडकीटोला और डांगीमांचा गांवों में सामाजिक-आर्थिक सर्वे कर ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों की आजीविका, लघु वनोपज आधारित गतिविधियों तथा वन संरक्षण में उनकी भूमिका को समझा। दुगली वन प्रसंस्करण केंद्र और नगरी डिपो में लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं इमारती लकड़ी प्रबंधन की प्रक्रियाओं का भी अवलोकन किया गया। दक्षिण सिंगपुर क्षेत्र में ‘पम्पारनाला’ जल संरक्षण संरचना का अध्ययन कर भू-जल संवर्धन उपायों की जानकारी प्राप्त की गई।
धमतरी के वनमंडलाधिकारी (DFO) जाधव श्रीकृष्ण ने प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि फील्ड आधारित प्रशिक्षण भविष्य के वन अधिकारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे तकनीकी दक्षता के साथ प्रकृति, पर्यावरण और ग्रामीण समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित होता है।

