कटनी के रीठी तहसील क्षेत्र में आदिम युग में जीने मजबूर नेगवां गांव के रहवासी बिजली, पानी, सड़क व स्वास्थ्य की बड़ी समस्या, आवागमन के लिए वाहनों तक की नहीं है सुविधा
एक ओर जहां हर तरफ आधूनिकाता की चकाचौंध देखने को मिल रही है तो वहीं दूसरी ओर रीठी जनपद पंचायत की एक ऐसी भी ग्राम पंचायत है, जहां के लोग आज भी आदिम युग में जीवन यापन करने मजबूर हैं। इस गांव की दीन दशा देखने के बाद सरकार किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत सामने आ जाती है। गांव तक पहुंचने के लिए कोई वाहन तक की सुविधा नहीं है। हम, बात कर रहे रीठी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत नेगवां की।
जहां आज तक नहीं बनी सड़क
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आजादी के बाद से आज तक नेगवां गांव जाने के लिए सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। घनघोर जंगल में बसे इस गांव के लोगों आज भी बदहाली का दंश झेलना पड़ रहा है। लगभग सात किलोमीटर पहाड़ में चढ़ने के लिए मुरम की फिसलन से ही जाना पड़ता है। इस ओर न तो जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न ही प्रशासन। नहीं है वाहनों की सुविधा बताया गया कि रीठी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत नेगवां में आश्रित गांव खुसरा, कुड़ाई, रमपुरा भी हैं। चार-चार गांव के लोग
आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। इन गांवों में आने-जाने के लिए कोई साधन नहीं है। न तो बस जाती है और न ही आटो रिक्शे। लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। बताया गया कि इन आदिवासी गांव के लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गरीब तबके के लोग गांव में ही जिंदगी बिताने मजबूर हैं।
बिजली, पानी व स्वास्थ्य का भी संकट घनघोर जंगल में बसे नेंगवां, खुसरा, कुड़ाई, रमपुरा के लोगों के बीच बिजली व पानी की भी विकराल समस्या है। हालात यह है कि यहां के रहवासी नींव जीवन जीने मजबूर हैं। शासन की सारी योजनाएं यहां दम तोड़ चुकी हैं। लोग आज भी विकास की बाट जोह रहे हैं। रहवासी बूंद-बूंद पानी को मोहताज है। वहीं स्वास्थ्य की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।

