कुरूद। तहसील कुरूद अंतर्गत ग्राम बगौद में जमीन विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्राम निवासी अभय राम साहू ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि वैध पट्टा होने के बावजूद उनके खिलाफ बेदखली वारंट जारी किया गया है। मामला अब प्रशासनिक निष्पक्षता और राजस्व प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
अभय राम साहू के मुताबिक, वे वर्षों से बजरंग चौक स्थित भूमि पर काबिज हैं। राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन प्रचलित आबादी भूमि के रूप में दर्ज है और वर्ष 2017 में उन्हें मुख्यमंत्री आबादी पट्टा भी जारी किया गया था। इसके बावजूद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय ने भूमि को घास भूमि मानते हुए बेदखली वारंट जारी कर दिया।
नोटिस अवधि पर उठे सवाल:
बेदखली आदेश 15 मई को जारी हुआ, जिसमें 18 मई सुबह 11 बजे तक अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए। इस बीच शनिवार और रविवार का अवकाश होने के कारण पीड़ित को अपील या कानूनी सलाह लेने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। इसे लेकर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्टे हटने के बाद शुरू हुआ था निर्माण:
पीड़ित का कहना है कि पूर्व में तहसीलदार न्यायालय द्वारा दिया गया स्थगन आदेश निरस्त होने के बाद उन्होंने निर्माण कार्य शुरू किया था। बाद में एसडीएम न्यायालय ने उस आदेश को त्रुटिपूर्ण बताते हुए निरस्त कर दिया, जिससे स्थिति और उलझ गई है।
दुर्भावना और दबाव के आरोप:
अभय राम साहू ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा जमीन की प्रकृति बदलवाकर उन्हें बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद एकतरफा कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन का पक्ष:
इस संबंध में तहसीलदार सूरज बंछोर ने कहा कि कार्रवाई न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत की जा रही है। उन्होंने बताया कि एसडीएम न्यायालय के आदेश के आधार पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
मामला अब केवल एक व्यक्ति की जमीन का नहीं, बल्कि राजस्व प्रक्रिया की पारदर्शिता और न्यायिक निष्पक्षता की कसौटी बनता नजर आ रहा है।

