पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक बार फिर आमजन की समस्याओं का अंबार देखने को मिला। पारिवारिक विवाद, जमीन-प्लॉट धोखाधड़ी, महिला अपराध, पैसों के लेन-देन और पुलिस द्वारा सुनवाई न होने जैसी गंभीर शिकायतों के साथ बड़ी संख्या में फरियादी पहुंचे। जनसुनवाई में सामने आई शिकायतों ने कहीं न कहीं जिले की कानून व्यवस्था और निचले स्तर की पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
फरियादियों ने आरोप लगाए कि थानों में उनकी शिकायतों पर समय पर सुनवाई नहीं हो रही, जिसके चलते उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक गुहार लगाने पहुंचना पड़ा। कई आवेदनों में भूमि संबंधी धोखाधड़ी और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली।
जनसुनवाई में साइबर अपराध से जुड़े मामलों की बढ़ती संख्या ने भी चिंता बढ़ाई। फरियादियों की शिकायतों के बाद पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब समस्याओं के समाधान के लिए आमजन को हर मंगलवार गुहार लगानी पड़ रही है, तो स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
जनसुनवाई में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने त्वरित निराकरण के निर्देश जरूर दिए, लेकिन लगातार सामने आ रहीं शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि जिले में पुलिस तंत्र की जमीनी कार्यप्रणाली पर गंभीर समीक्षा की जरूरत है। जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर थानों में समय पर सुनवाई होती, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग जनसुनवाई तक क्यों पहुंचते?

